भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 191, कुल 684 में से

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१९० फलदीपिका होता है। ऐसा व्यक्ति बहुत विख्यात, दीर्घायु, अपने कुल का पालन करने वाला श्रेष्ठ व्यक्ति होता है। ॥१२॥ यदि नवम में बुध हो तो मनुष्य विद्वान्, धनवान्, धार्मिक और आचारवान् होता है। ऐसा व्यक्ति बहुत बोलने वाला (इसे सद्गुण के अर्थ में लेना चाहिये अवगुण में नहीं) और प्रवीण होता है। दशम में बुध हो तो विद्वान्, बलवान्, बुद्धिमान्, सुखी, सत्कर्म करने वाला सत्यान्वित (सत्य पर कायम रहने वाला होता है) और सफलता प्राप्त करता है। जिस कार्य को प्रारम्भ करता है उसमें प्रारम्भ में ही सिद्धि (सफलता) प्राप्त होती है। यदि ग्यारहवें में बुध हो तो दीर्घायु सच बात पर कायम रहने वाला (अर्थात् जो वचन दे दिया उसे पूरा करने वाला) विपुल धन वाला, सुखी होता है। ऐसे व्यक्ति को नौकरों का सुख भी प्राप्त होता है। द्वादश में बुध का निकृष्ट फल है। ऐसा व्यक्ति दीन, आलसी, क्रूर, विद्याहीन होता है तथा अपमान को भी प्राप्त होता है। ॥१३॥ शोभावान् सुकृती चिरायुरभयो लग्ने गुरौ सात्मजो वाग्मी भोजनसारवांश्च सुमुखो वित्ते धनी कोविदः । सावज्ञः कृपणः प्रतीतसहजः शौर्येऽघकृद्दुष्टधी- 1 र्बन्धौ मातृसुहृत्परिच्छदसुतस्त्रीसौख्यधान्यान्वितः ॥१४॥ पुत्रैः क्लेशयुतो महीशसचिवो धीमान् सुतस्थे गुरौ षष्ठे स्यादलसोऽरिहा परिभवी मन्त्राभिचारे पटुः । सत्पत्नीसुतवान्मदेऽतिसुभगस्तातादुदारोऽधिको दीनो जीवति सेवया कलुषभाग्दीर्घायुरिज्येऽष्टमे ॥१५॥ ख्यातः सन् सचिवः शुभेऽर्थसुतवान् स्याद्धर्मकार्योत्सुकः स्वाचारः सुयशा नभस्यतिधनी जीवे महीशप्रियः ।

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