भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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१९४ फलदीपिका को मिले। उसे मित्रों का सुख हो, अत्यन्त सम्मान, यश और ऊंची पदवी प्राप्त हो। यदि एकादश में शुक्र हो तो धनी हो, दूसरों की स्त्रियों में रत रहे और अनेक प्रकार के सुख प्राप्त हों। यदि शुक्र बारहवें घर में हो तो ऐसे व्यक्ति को रति (स्त्रयों के साथ संयोग का सुख) धन और वैभव प्राप्त हो ।। । १९ ॥ अब शनि का विविध भावगत फल बताते हैं । स्वोच्चे स्वकीयभवने क्षितिपालतुल्यो लग्नेऽर्कजे भवति देशपुराधिनाथः । शेषेषु दुःखपरिपीडित एव बाल्ये दारिद्र्यदुःखवशगो मलिनोऽलसश्च ॥२०॥ विमुखमधनमर्थेऽन्यायवन्तं च पश्चा- दितरजनपदस्थं यानभोगार्थयुक्तम् । विपुलमतिमुदारं दारसौख्यं च शौर्ये जनयति रविपुत्रश्चालसं विह्वलं च ॥२१॥ दुःखी स्याद्गृहयानमातृवियुतो बाल्ये सरुग्बन्धुभे भ्रान्तो ज्ञानसुतार्थहर्षरहितो धीस्थे शठो दुर्मतिः । बह्वाशी द्रविणान्वितो रिपुहतो धृष्टश्च मानी रिपौ कामस्थे रविजे कुदारनिरतो निःस्वोऽध्वगो विह्वलः ॥२२॥ शनैश्चरे मृतिस्थिते मलीमसोऽशंसोऽवसुः । करालधीर्बुभुक्षितः सुहृज्जनवमानितः ॥२३॥