भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 229

२२८ फलदीपिका यह देखिये कि लग्न और चन्द्रमा दोनों में कौन बलवान् है । जो बलवान् हो वह यदि । (१) मेष या वृश्चिक राशि में हो और मंगल के त्रिंशांश में हो दुष्टा, यदि शनि के त्रिंशांश में हो तो दासी, गुरु के त्रिंशांश में हो तो सुशीला और धनी, बुध के त्रिंशांश में हो तो मायाविनी और शुक्र के त्रिंशांश में हो तो चरित्र दोष से युक्त होता है। (२) वृष या तुला राशि में हो और मंगल के त्रिंशांश में हो तो बहुत दूषण (चरित्र दोष) से युक्त, शनि के त्रिंशांश में हो तो अन्य पति से समागम करने वाली (अन्य के पति से या स्वयं दूसरा विवाह करें), गुरु के त्रिंशांश में हो तो पूज्या (आदरणीया), बुध के त्रिंशांश में हो तो विदुषी ओर शुक्र के त्रिंशांश में हो प्रसिद्ध-ख्याति वाली हो । (३) यदि मिथुन या कन्या की राशि में हो और मंगल के त्रिंशांश में हो तो कपटिनी, शुक्र के त्रिंशांश में हो तो नपुंसक के समान, गुरु के त्रिंशांश में हो तो साध्वी, बुध के त्रिंशांश में हो तो गुणवती और शुक्र के त्रिंशांश में हो तो विलास के लिये उत्सुक रहे । (४) यदि कर्क राशि में हो और मंगल के त्रिंशांश में हो तो स्वच्छन्दा, शनि के त्रिंशांश में पति घातिनी, गुरु के त्रिंशांश में विशिष्ट गुणों से युक्त, बुध के त्रिंशांश में शिल्पकला में कुशल और शुक्र के त्रिंशांश में उत्तम आचरण वाली होती है । (५) यदि धनु या मीन राशि में हो और मंगल के त्रिंशांश में हो तो गुणवती, शनि के त्रिंशांश में हो तो संभोग की कम इच्छा रखने वाली, गुरु के त्रिंशांश में हो तो गुणशालिनी, बुध के त्रिंशांश में हो तो कला कुशल और शुक्र के त्रिंशांश में हो तो सच्चरित्रा होती है । (६) यदि मकर या कुंभ राशि में हो और मंगल के त्रिंशांश में हो तो दासी, शनि के त्रिंशांश में हो तो अन्य पुरुष में आसक्त, गुरु के त्रिंशांश में हो तो पति को अपने अधीन रखने वाली, बुध के त्रिंशांश