फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४६ फलदीपिका विलग्नकामात्मजनायकानां योगात्समानाय्य दशां महाख्याम् । सुतस्थतद्वीक्षकतत्पतीनां दशापहारेषु सुतोद्भवः स्यात् ॥२७॥ पुत्र प्राप्ति कब होगी यह समय निकालने के लिये एक अन्य प्रकार और बताते हैं । नीचे लिखे तीनों को जोड़िये-- (क) लग्नेश की राशि, अंश, कला, विकला । (ख) सप्तमेश की राशि, अंश, कला, बिकला । (ग) पंचमेश की राशि, अंश, कला, विकला । इनको जोड़ने से जो राशि, अंश, कला, विकला आवे वह किस नक्षत्र के अन्तर्गत पड़ती है यह निकालिये । * इस नक्षत्र के स्वामी को जब महादशा हो और निम्नलिखित में से किमी की अन्तर्दशा हो तो पुत्रोत्पत्ति होती है । (i) पंचम भाव में जो ग्रह हो । (ii) जो ग्रह पंचम को देखता हो । (iii) पंचमेश । सुतपतिगुर्वोरथवा तद्युक्तराश्यंशकाधिपानां वा । बलसहितस्य दशायामपहारे वा सु