फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४८ फलदीपिका आधानलग्नादथवा त्रिकोणे रवौ यदा जन्म वदेन्नराणाम् ॥३१॥ बच्चा किस समय पैदा होगा? (क) जिस राशि में गर्भाधान हुआ है उस राशि से तृतीय में जब गोचर वश सूर्य आवे । (ख) गर्भाधान जिस लग्न से हुआ है उससे पांचवीं या नवीं राशि में जब गोचर वश सूर्य आवे । ॥३१॥ आधानलग्नात्सुतभेशजन्म भाग्येऽपि वा पुण्यवशाच्च वाच्यम् आधानलग्ने शुभदृष्टियोगे दीर्घायुरैश्वर्ययुतो नरः स्यात् ॥३२॥ जिस लग्न में गर्भाधान हुआ है उस लग्न से नवम या पंचम लग्न में यदि जन्म हो तो यह समझना चाहिये कि यह पुण्य कर्म का फल है । यदि आधान लग्न में शुभ-ग्रह बैठे हों या आधान लग्न को शुभ-ग्रह देखते हों तो जो बच्चा पैदा होता है वह दीर्घायु और ऐश्वर्य- शाली होता है । जिस लग्न में गर्भ रहे उसको आधान लग्न कहते हैं । ॥३२॥ तत्कालेन्दुद्वादशांशे मेषात्तावति भेऽपि वा । तस्मात्तावति भे वापि जन्मचन्द्रं वदेद्बुधः ॥३३॥ यह गणित कीजिये कि जब गर्भाधान हुआ है उस समय चन्द्रमा किस राशि और किस द्वादशांश में था । मेष से उतने ही द्वाद-