भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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बारहवाँ अध्याय : पुत्रभाव फल २४९ शांश गिनने पर जो राशि आवे वह बालक की जन्म राशि होगी। अथवा मेष से गिनने की बजाय गर्भाधान चन्द्र की राशि से गिनिये और इस गिनती से जो राशि आवे वह बालक की जन्म राशि होगी ।॥३३॥ प्रश्नात्मजस्वीकरणोपनोतिकन्याप्रदानाभिनवार्तवेषु । आधानकालेऽपि च जन्मतुल्यं फलं वदेज्जन्मविलग्नतश्च ॥३४॥ जैसे जन्म कुण्डली से सन्तान विचार करना बताया गया है वैसे ही निम्नलिखित समयों में से किसी भी समय की कुण्डली बनाकर यह निर्णय कर सकते हैं कि सन्तान सम्बन्धी क्या भविष्य है। कहने का तात्पर्य यह है कि इस अध्याय में ग्रहों की शुभाशुभता के जो सिद्धान्त बताये गये हैं उन्हें केवल जन्म कुण्डली में ही नहीं अपितु निम्नलिखित कुण्डलियों में भी लागू करना चाहिये :— (i) प्रश्न कुण्डली अर्थात् प्रश्न करने के समय की कुण्डली। (ii) बच्चे को दत्तक पुत्र लेने के समय की कुण्डली । (iii) उपनयन के समय की कुण्डली । (iv) कन्यादान के समय की कुण्डली । (v) जब कन्या को पहली बार रजोदर्शन हो उस समय की कुण्डली । (vi) गर्भाधान के समय की कुण्डली । इन सब कुण्डलियों में लग्न तथा चन्द्र लग्न (चन्द्रमा जिस राशि में हो) दोनों से उसी प्रकार ग्रह स्थिति का विचार करना जैसे जन्म कुण्डली में किया जाता है।