फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
DevanagariHindipublished684 पृष्ठ
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- द - श - ा - प ् - र - क - ा - र - ा - त ् । Wait, "दशयोडु" -> द - श - यो - डु = दशयोडु! (दशया + उडु = दशयोडु). Then: द - श - ा - प ् - र - क - ा - र - ा - त ् = दशाप्रकारात् । Yes! "यत्कालचक्रदशयोडुदशाप्रकारात् ।"
Let's check line 21: "नीरोग रहता हुआ सौ वर्ष तक जीता है । ॥२४॥" Notice there is a dot above in line 12? Under "दोषों" there is a stray dot in line 13: "होता है ." - just print noise. In line 13: "बहुत शुभ होता है ।॥२३॥"
Everything looks very clean, precise, and matches the printed page exactly.तेरहवाँ अध्याय : आयुर्भाव २६३ एको बहूनि दुरितानि सुदुस्तराणि भक्त्या प्रयुक्त इव चक्रधरे प्रणामः ॥२२॥ यदि बलवान्, बृहस्पति लग्न में बैठा हो (किन्तु अस्त नहीं होना चाहिये) तो वह अनेक दोषों को शान्त करता है जैसे यदि भक्ति पूर्वक भगवान विष्णु को एक बार प्रणाम किया जाय तो अनेक संकट दूर हो