भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 282, कुल 684 में से

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चौदहवाँ अध्याय : रोगनिर्णय २८१ हैं, पृष्ठोदय राशि अधोगति कारक है । शीर्षोदय राशियाँ मिथुन, कन्या, तुला वृश्चिक और, कुंभ हैं । पृष्ठोदय मेष, वृष, कर्क, धनु और मकर हैं। मीन उभयोदय है । (ख) (१) मरण के बाद की अवस्था का विचार (i) बारहवें घर में जो ग्रह हो या ग्रह हों उनसे (ii) बारहवाँ घर जिस नवांश में हो उस नवांश में जो ग्रह हो उससे या जो ग्रह हों उनसे (iii) बारहवें घर का स्वामी जिस ग्रह या जिन ग्रहों से सम्बन्ध करता --उनसे, करना चाहिये । (२) यदि सूर्य या चन्द्र उपर्युक्त ग्रह हों तो जातक मरण के बाद कैलास (शिव लोक) को जाता है; मंगल हो तो पुनः पृथ्वीपर शीघ्र जन्म ले लेता है। बुध हो तो वैकुंठ को जायगा; बृहस्पति ब्रह्म लोक को ले जावेगा; शुक्र स्वर्ग को; शनि यमपुरी को, राहु हो तो दूसरे द्वीपों को केतु हो तो नरक गामी होगा ॥२३॥ आगे के जन्म का विचार बारहवें घर से बताया गया है । अब पूर्व जन्म का विचार किस भाव से करना चाहिये यह बताते हैं । पूर्व जन्म का विचार नवें घर से करे। इसी प्रकार, मृत्यु के बाद क्या अवस्था होती है—यह तो ऊपर बता चुके हैं किन्तु जिस जिस लोक में मरने के बाद जीव जाता है—उस उस लोक में कुछ समय के बाद “क्षीणे पुण्ये मर्त्य लोकं विशन्ति” गीता के इस कथन के अनुसार रह कर पुनः पृथ्वी पर जन्म कहाँ होगा—कैसी अवस्था में होगा इत्यादि का विचार पाँचवें घर से करना चाहिये । (४) जाति, देश आदि का विचार किस दिशा में पूर्व जन्म या किस दिशा में भविष्य जन्म होगा—इन सब बातों का विचार नवम से, नवमाधीश, से नवम में बैठे हुए ग्रह या ग्रहों से (पूर्व जन्म के विषय में) । तथा पंचम से, पंचमाधीश से, पंचम में बैठे हुए ग्रह या ग्रहों से (पुनर्जन्म के विषय में) करना चाहिये ।२४।।

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