फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३३२ फलदीपिका यदि जातक का जन्म रात्रि का हो तो यह देखिये कि गुलिक किस राशि में है। उस राशि से जब त्रिकोण में गोचरवश शनि आवे तो जातक की मृत्यु हो सकती है और यदि दिन का जन्म हो तो गुलिक जिस राशि में है उससे सप्तम राशि में जब गोचरवश शनि आवे तो मृत्युप्रद हो सकता है ।।२१।। गुरुराहुस्फुटैक्यस्य राशिं यातो गुरुर्यदा । तदा तु निधनं विद्यात्तत्त्रिकोणगतोऽथवा ॥२२॥ बृहस्पति स्पष्ट और राहु स्पष्ट को जोड़ लीजिये। जो राशि आवे उसमें गोचरवश जब बृहस्पति जावे या उस राशि से नवम या पंचम गुरु गोचर में हो तो मृत्युप्रद हो सकता है ।।२२।। अष्टमस्य त्रिभागांशपतिस्थितगृहं शनौ । तदीशनवभागाक्षं गते वा मरणं भवेत् ॥२३॥ (१) लग्न से गिनने पर अष्टम भाव मध्य पर जो द्रेष्काण हो उस द्रेष्काण का स्वामी जन्मकुण्डली में जहाँ बैठा है उस राशि में गोचरवश जब शनि आवे तो जातक की मृत्यु हो सकती है । (२) जन्म लग्न से अष्टमेश जिस नवांश में हो उस नवांश राशि में भी जब शनि गोचरवश भ्रमण करे तो मृत्यु कर सकता है। ।।२३।। जन्मकाले शनौ यस्य जन्माष्टमपतेरपि । राशेरंशकराशेर्वा त्रिकोणस्थे शनौ मृतिः ॥२४॥ (१) जन्म कुण्डली में शनि जिस राशि और अंश में है उस राशि या उस अंश में या उससे नवमपंचम जब गोचरवश शनि