फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३५० फलदीपिका भारत में कई स्थलों में, विशेष कर केरल में, ३६० दिन का चांद्र वर्ष लेते हैं किन्तु उपर्युक्त श्लोक के अनुसार जन्म के समय सूर्य जिस राशि, अंश, कला, विकला पर था उसी राशि, अंश कला, विकला पर जब लौट कर आवे तब एक वर्ष मानना और इसी वर्ष मान से महादशा निकालना। इसी सौर वर्ष का बारहवाँ भाग मास और इस मास का तीसवाँ भाग दिन समझना चाहिये । दशाफल भानुः करोति कलहं क्षितिपालकोप- माकस्मिकं स्वजनरोगपरिभ्रमं च । अन्योन्यवैरमतिदुःसहचित्तकोपं गुप्त्यर्थधान्यसुतदारकृशानुपीड़ाम् ॥५॥ क्रौर्याध्वभूपैः कलहैर्धनार्त्तिं वनाद्रिसंचारमतिप्रसिद्धिम् । करोति सुस्थो विजयं दिनेश- स्तैक्ष्ण्यं सदोद्योगरतिं सुखं च ॥६॥ मनःप्रसादं प्रकरोति चन्द्रः सर्वार्थसिद्धिं सुखभोजनं च । स्त्रीपुत्रभूषाम्बररत्नसिद्धिं गोक्षेत्रलाभं द्विजपूजनं च ॥७॥ बलेन सर्वं शशिनस्तु वाच्यं पूर्वे दशाहे फलमत्र मध्यम् । मध्ये दशाहे परिपूर्णवीर्यं तृतीयभागेऽल्पफलं क्रमेण ॥८॥