भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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४८ फलदीपिका जल तत्व । इसकी अधिष्ठात्री देवी अम्बा (पार्वती) । मंगल का अग्नि तत्व और देवता कार्तिक स्वामी । बुध का पृथ्वी तत्व और इसके अधिष्ठाता देव विष्णु हैं । बृहस्पति का आकाश तत्व और ब्रह्मा देवता । शुक्र का जल तत्व और अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी । शनि का वायु तत्व और देवता यम । राहु का अधिष्ठाता आदि शेष और केतु का ब्रह्मा है । राहु और केतु चमकने वाले ग्रह नहीं हैं; ये केवल स्थान विशेष हैं इस कारण इनके तत्व का निर्देश नहीं किया । वैसे शनि की तरह वात प्रभाव दिखाने के कारण वायु तत्व माना जा सकता है । ग्रहों के अधिष्ठाता देवता बताने का तात्पर्य यह है कि जिस ग्रह का नवें या पांचवें घर से सम्बन्ध हो उस ग्रह से सम्बन्धित देवता में भक्ति होगी । देखिये कल्याण वर्ष २८ संख्या ४ में हमारा लेख भगवद्भक्ति और नवग्रह । जिस ग्रह की महादशा अन्तर्दशा में रोग या पीड़ा हो उस ग्रह से सम्बन्धित देवता की आराधना से पीड़ा शीघ्र शान्त होगी । गोधूमं तण्डुलं वै तिलचणककुलुत्थाढकश्याममुद्गा निष्पावा माष अर्केन्द्वसितगुहशिखिक्रूरविद्भूग्वहीनाम् । भोगीनाक्यर्जरिजोवज्ञशशिशिखिसितेष्वम्बराख्यं कलिङ्गं सौराष्ट्रावन्तिसिन्धून्सुमगधयवनान्पर्वतान्कीकटाइंच ॥२८॥ माणिक्यं तरणेः सुधायममलं मुक्ताफलं शीतगो- र्माहेयस्य च विद्रुमं मरकतं सौम्यस्य गारुत्मतम् । देवेड्यस्य च पुष्परागमसुरामात्यस्य वज्रं शने- र्नीलं निर्मलमन्ययोश्च गदिते गोमेधवैदूर्यके ॥२९॥ इसे श्लोकों में किस ग्रह का किस अन्न पर विशेष प्रभाव है और किस देश या प्रान्त विशेष पर विशेष अधिकार है—आदि बताते हैं ।