फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५० फलदीपिका ग्रह धातु वस्त्र स्वाद सूर्य तांबा केसरिया कड़वा चन्द्रमा कांसा सफेद नमकीन मंगल तांबा लाल (जला हुआ) तिक्त (तीखा) बुध सीसा हरा मिला-जुला बृहस्पति सोना पीला मीठा शुक्र चाँदी सफेद या धब्बेदार खट्टा शनि लोहा काला (पुराना) कसैला विशेष यह है कि मंगल से—अग्नि से जला हुआ कपड़ा तथा शनि से पुराना जीर्ण वस्त्र समझना चाहिये। सूर्य का स्वाद कड़वा और मंगल का तिक्त या तीखा बताया गया है। भारतीय पद्धति में मधुर कटु, अम्ल, तिक्त, कषाय और लवण ये छः रस माने गये हैं सो छः ग्रहों के छः रस अलग-अलग बताये गये हैं। बुध का मिला जुला। भास्वग्दीष्पतिचन्द्रजक्षितिभुवां स्याद्दक्षिणे लाञ्छनं शेषाणामितरत्र तिग्मकिरणात्कट्यां शिरःपृष्ठयोः। कक्षेंऽसे वदने च सक्थिचरणे चिह्नं वयांस्यर्कतो नेमे नाथ तटं नखं नग सनि ज्ञानाढ्य नग्नाटनम् ॥३२॥ अब ग्रहों के चिह्न स्थान किस ओर (दाहिनी ओर या बायीं ओर), तथा ग्रहों की अवस्था (उम्र) बतायी जाती है। सूर्य दाहिनी ओर कूल्हे पर या कमर पर उम्र ५० वर्ष चन्द्र बायीं ओर सिर पर ,, ७० ,, मंगल दाहिनी ओर पीठ पर ,, १६ ,, बुध दाहिनी ओर १बगल में ,, २० ,, बृहस्पति दाहिनी ओर कंधे पर ,, ३० ,, शुक्र बायीं ओर चेहरे पर ,, ७ ,, शनि बायीं ओर पैर (टांग) में ,, १०० ,, १. बगल—कांख।