भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 536

बाईसवाँ अध्याय : मिश्रदशा ५३५ जो धर्म कर्म में निरत है (शास्त्रों में बताये गये धर्म और कर्म करते हैं) जितेन्द्रिय, पथ्य भोजन (स्वास्थ्य के अनुकूल पदार्थ जितनी मात्रा में जितनी बार खाना चाहिये उतना ही भोजन) करते हैं, ब्राह्मण और देवताओं के जो भक्त हैं जो अपने कुल, शील की मर्यादानुसार आचार-विचार का पालन करते हैं--उनकी आयुर्दाय ऊपर विद्वानों ने बताई हैं । ॥ ३२॥