फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतेईसवाँ अध्याय अष्टकवर्ग ग्रहों के विभिन्न राशियों में भ्रमण करने से व्यक्ति विशेष पर क्या शुभाशुभ प्रभाव होता है इसे गोचर फल कहते हैं। साधारणतः जन्म राशि (जिस राशि में जन्म के समय चन्द्रमा हो) से गोचर विचार किया जाता है। उदाहरण के लिये जन्मकालीन चन्द्र राशि से जब चतुर्थ राशि में बृहस्पति भ्रमण करे तो अनिष्ट फल—जब साल भर के बाद जन्म राशि से पाँचवीं राशि में बृहस्पति आ जावे तो उत्तम फल—जब फिर बृहस्पति छठी राशि में आ जावे, तो जन्म चन्द्रमा से षष्ठ होने के कारण अनिष्ट फल आदि विचार गोचर विचार कहलाता है। गोचर विचार में जन्म के ग्रह जहाँ हों वहीं माने जाते हैं और जिस समय का गोचर विचार करना हो उस समय विचारणीय ग्रह कहाँ हैं यह पंचांग में देखा जाता है। गोचर विचार केवल जन्मकालीन चन्द्रमा से करना, यह साधारण प्रथा है। किन्तु जो विशेष सूक्ष्म विचार करते हैं उनका कहना है कि मान लीजिये जन्मकालीन चन्द्रमा से तो आजकल बृहस्पति अनिष्ट स्थान पर है परन्तु जन्मकालीन अन्य ग्रहों से यदि बृहस्पति अच्छे स्थान पर हो तो क्या आप गोचरस्थ बृहस्पति को निकृष्ट कहेंगे ? या इसका उलटा दृष्टांत लीजिये। जन्म- कालीन चन्द्रमा से तो बृहस्पति इष्ट स्थान पर है किन्तु सूर्य, मंगल, बुध, जन्मकालीन बृहस्पति, शुक्र, शनि और जन्म लग्न से आजकल बृहस्पति अनिष्ट स्थान पर हो तो क्या आप गोचरस्थ (जहाँ आजकल बृहस्पति जा रहा हो उसे) शुभ कहेंगे ? कहने का तात्पर्य यह है कि जैसे चन्द्रमा से गोचर विचार किया जाता है वैसे ही अन्य ग्रहों और लग्न से