भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

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तेईसवाँ अध्याय : अष्टकवर्ग ५५७ उदाहरण के लिए सिंह राशि में सातों अष्टक वर्ग में क्रमशः ५, ६, ५, ५, ७, ५, ७, यह शुभ बिन्दु क्रमशः सूर्य आदि सातों ग्रहों के अष्टक वर्ग में पड़े हैं। इनका योग ४० हुआ तो सर्वाष्टक वर्ग में सिंह राशि में ४० संख्या लिखेंगे। इसी प्रकार प्रत्येक राशि में जितने शुभ बिन्दु पड़े हैं उनका योग सर्वाष्टक वर्ग में लिखा जाता है। सूर्य का अष्टकवर्गं चन्द्रमा का अष्टकवर्गं मंगल का अष्टकवर्गं बुध का अष्टकवर्गं