भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 559, कुल 684 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 559

५५८ फलदीपिका बृहस्पति का अष्टकवर्ग शुक्र का अष्टकवर्ग शनि का अष्टकवर्ग ऽ——ऽ इस प्रकार सर्वाष्टक वर्ग बनाने पर यह देखना चाहिये कि प्रत्येक राशि में कुल कितने शुभ बिन्दु पड़े। जिस राशि में २८ से अधिक शुभ बिन्दु पड़ें, उसमें जब गोचरवश कोई ग्रह जाता है तो अच्छा फल दिखाता है। यदि २८ से कम संख्या हो और उसमें गोचरवश कोई ग्रह जावे तो अशुभ फल दिखावेगा। २८ से संख्या जितनी कम होगी उतना अशुभ फल अधिक होगा। यहाँ एक शंका यह होती है कि