भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 565

५६४ फलदीपिका मालूम पड़ती हो तब उस वर्ष में किस महीने में मृत्यु की संभावना है यह देखने के लिये सूर्य का गोचर फल बताया गया है। जैसे सूर्य के अष्टक वर्ग से ऊपर के श्लोकों में पिता का मृत्युकाल निश्चय करने के नियम बताये गये, इसी प्रकार चन्द्रमा के अष्टकवर्ग से माता का मंगल के अष्टकवर्ग से भाई का··इत्यादि विचार बुद्धिमान् व्यक्ति को करना चाहिये ॥५-६॥ चन्द्रात्सुखफलैः पिण्डं हत्वा सारावशेषितम् । शनौ याते मातृहानिः त्रिकोणक्षंगतेऽपि वा ॥७॥ चन्द्रमा के अष्टकवर्ग में चन्द्रमा से चौथी राशि में जितने शुभ बिन्दु हों उनको चन्द्रमा के अष्टक वर्ग के शोध्यपिंड से गुणा कीजिये। जो गुणन फल आवे उसमें २७ का भाग दीजिये। जो शेष आवे उस नक्षत्र की संख्या में या उससे त्रिकोण के नक्षत्र में जब शनि गोचरवश आवे तब माता की मृत्यु की संभावना होती है ॥७॥ चन्द्रात्सुखाष्टमेशांशत्रिकोणे दिवसाधिपे । मातुर्वियोगं तन्मासे निर्दिशेल्लग्नतः पितुः ॥८॥ चन्द्रमा जिस राशि में हो—उससे चौथे और आठवें घर के मालिक किस नवांश में बैठे हैं यह देखिये । जब इन नवांश से गोचर वश सूर्य त्रिकोण में जावे—तो माता की मृत्यु होती है। जैसे ऊपर चन्द्रमा से चौथे और आठवें के मालिक किन नवांशों में हैं, वैसे लग्न से चौथे और आठवें के मालिक किन नवांशों में हैं यह देखिये—उन नवांश राशियों से जब त्रिकोण में सूर्य जावे तो पिता की मृत्यु होती है ॥८॥