भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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न्द्रदयितं भूपालतुल्यं नरम् ॥ ८ ॥` Wait, "नृपेन्द्रदयितं": नृ (nri) पे (pe) न्द्र (ndra) द (da) यि (yi) तं (tam) Yes: "नृपेन्द्रदयितं".

Line 18: श्रेष्ठाश्वद्विपवाहनादि विभवं पारावताधिष्ठितः

Line 19: सत्कीर्तिं यदि देवलोकसहितो भूमण्डलाधीश्वरम् ।

Line 20: वन्द्यं भूपतिभिः सुरेन्द्रसदृशं त्वैरावतांशास्थितः Wait, look at "त्वैरावतांशास्थितः" again. Is it "त्वैरावतांशस्थितः"? Let's look at the meter: वन् (G) द्यं (G) भू (G) प (L) ति (L) भिः (G) सु (L) रें (G) द्र (L) स (L) दृ (L) शं (G) त्वै (G) रा (G) व (L) तां (G) श (L) स्थि (L) तः (G) -- wait! In Shardulavikridita: Syllable 13: त्वै (G) Syllable 14: रा