फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६३८ फलदीपिका से बीस अंश तक विशेष प्रभाव या फल उत्पन्न करते हैं। चन्द्रमा और शनि राशि के अन्तिम तृतीयांश अर्थात् २० अंश से ३० अंश तक विशेष फल दिखाते हैं। बुध और राहु सारी राशि में अर्थात् एक अंश से तीस अंश तक सर्वत्र एक सा फल दिखाते हैं ॥२५॥ टिप्पणी—मुहूर्त्त चिंतामणि तथा अन्य कई ग्रंथों में शंका उठाई है कि वेध कारक ग्रह की गणना जन्मकालीन चन्द्र राशि से करना या गोचर द्वारा जिस ग्रह का विचार किया जा रहा है उससे करना। विपरीत-वेध का भी विचार किया है। किंतु इस छोटी सी पुस्तक में नारद कश्यप आदि ऋषि प्रणीत विभिन्न आदेशों का परस्पर सामंजस्य करना संभव नहीं है। जो शास्त्रार्थ की जटिलता में विशेष अभिरुचि रखते हों वे संस्कृत की सम्बन्धित पुस्तकों का अवलोकन कर सकते हैं।