फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
DevanagariHindipublished684 पृष्ठ
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छब्बीसवां अध्याय : गोचरफल ६३९
अथ मतान्तरेण रव्यादिग्रहाणां जन्मभाद्गोचरफलवेधयोर्ज्ञानाय चक्रम् ।
| श्री | सूर्यः | चन्द्रः | भौमः | बुधः | बृहस्पतिः | शुक्रः | शनिः | राहुः | केतुः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १ | स्थाननाशः<br>पन्था | पुष्टिः<br>अन्नलाभः | भयम्पी-<br>डाच | बंधनं<br>भयम् | अरिष्टादि<br>भय | सुख<br>शत्रुनाश | सर्वनाश<br>पीडामय | हानि<br>कष्ट | हानि<br>रोगभय |
| २ | हानिः<br>भयम् | धनलाभः<br>सुखम् | धननाशः<br>नेत्रातिः | धनलाभः | धनादि-<br>लाभ | सुखम्<br>अर्थलाभः | शोकः<br>धनहानिः | नैस्वं<br>व्ययञ्च | वैरं<br>वित्तनाशः |
| ३ | सुखं<br>श्रियाप्तिः | द्रव्याप्तिः<br>सुखम् | सुखं<br>श्रीप्राप्तिः | शत्रुतौ<br>भयम् | भय<br>रोगाप्ति | सुखम्<br>अर्थलाभः | सुखार्थलाभः | नैरुज्यं<br>च नृप्रप्तिः | सुखलाभ<br>वृद्धि |
| ४ | रोगभयं<br>माननाशः | रोगदाना-<br>र्थनाशः | कष्टं<br>शत्रुभीतिः | धन सुखा-<br>दिप्राप्तिः | धनहानि<br>व्ययम् | धनागमः | पीडाभयं<br>शत्रुवृद्धिः | वैरं<br>शोकश्चैव | भीति<br>पीड़ा |
| ५ | दैन्यं<br>अर्थनाशः | सुखं<br>कार्यनाशः | दृग्भयं<br>धननाशः | रुक्-<br>शोकश्च | लाभः<br>सुखं च | लाभः<br>पुत्रलाभः | धनपुत्रयो-<br>र्नाशः | हानिः<br>शोकश्च | शोक<br>अर्थनाश |
| ६ | रिपुनाशः<br>सुखं | वित्तलाभः | सुखार्थ-<br>लाभः | अलाभः<br>स्थितिः | रोगः<br>शोकश्च | शत्रुवृद्धिः<br>पीडा च | सुखं<br>वित्तलाभः | सुखं लक्ष्मी<br>प्राप्तिः | सुखम्<br>वित्तद् |
| ७ | गमनं<br>धनहानिः | द्रव्यप्राप्ति<br>सुखम् | कार्यम्<br>धननाशः | पीडामय<br>विग्रहः | सम्मानं<br>सुखं च | शोकः<br>अतिभयम् | दोषः<br>पीडामयम् | हानिः<br>कलहः | दुर्गति<br>पीड़ाच |