फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
DevanagariHindipublished684 पृष्ठ
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६४० फलदीपिका
| श्री | सूर्यः | चन्द्रः | भौमः | बुधः | बृहस्पतिः | शुक्रः | शनिः | राहुः | केतुः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ८ | रोगाप्तिः भयम् | क्लेशभयं मृत्युः | भयं पाप बुद्धिः | धनावाप्ति हानिः | मृत्युभय पीड़ा च | विपत्तिः धनक्षयः | पीड़ाभयम् शत्रुवृद्धिः | रुग्भयं सुखं च | पीड़ाभयं हानिश्च |
| ९ | कान्तिक्षयः पापबुद्धिः | मानं नृपभयम् | रुग्भयम् | रुग्भयं धननाशः | सुखं सम्मानम् | सुखं लाभः | पापः धननाशः | पापकर्म रतिः | पापं दैन्यञ्च |
| १० | सौख्यं कर्मसिद्धिः | शुभं सुखम् | सुखं शोकश्च | सुखं सुभोगः | अति-दैन्यम् | धर्मनाशः असुखम् | वैमनस्यम् | वैरं सुखम् | भयं शोकश्च |
| ११ | वित्ताप्तिः सुखम् | विविधार्थ लाभः | लाभः सुखाप्तिः | शुभम-र्थागमः | सौख्यं धनप्राप्तिः | दुःखं धनागमः | सुखवित्त-लाभः | सुखं वित्तप्राप्ति | सुयशो-ऽर्थलाभः |
| १२ | द्रव्यनाशः पीड़ाभयं | रोगो धननाशः | रोगश्शो-कश्च | शोकः धननाशः | देहपीडा भय | धनागमः | क्लेश अनर्थश्च | हानिः पीड़ा च | पीड़ा वैरञ्च |
| शु. | ३।११ ६।१०। | ७।६।१०। १।३।११। | ३।६। ११ | २।४। ६।८। १०।११ | ५।२।९ ।७।११ | १।२।३ ४।५।८ ९।१२।११ | ६।११ ।३। | ३।११ ६ | ३।६ ११ |
| वे. | ९।५। १२।४। शनिवर्जितः | २।१२।४ ५।९।८ बुधवर्जितः | १२।९ ।५। | ५।३।९। ४।८।१२ चंद्रवर्जितः | ४।१२ १०।३ ८। | ८।७।१ १०।१२।५ ११।६।३ | ९।५। १२ रविवर्जितः | १२।५ ९ । | १२।९ ।५। |