भारतकोश
प्रबन्धचिन्तामणि (गुजरात, मालवा व चालुक्य ऐतिहासिक प्रबन्ध)

प्रबन्धचिन्तामणि (गुजरात, मालवा व चालुक्य ऐतिहासिक प्रबन्ध)

Prabandha Chintamani with Hindi Translation

मेरुतुङ्गाचार्य (१३०४ ई.) / पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा

DevanagariHindipublished181 पृष्ठ

पृष्ठ 121, कुल 181 में से

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इस्तीफे चउलिग नामक महावतने, किसी अपराधमें राजासे फटकार पा कर, क्रोधसे अंकुश-त्याग कर दिया। इसके बाद, अनेक गुणके पात्र ऐसे सामल नामक महावतको खूब वस्त्र और धन आदि दे कर उस पद पर नियुक्त किया। उसने 'कलहपञ्चानन' (युद्धका सिंह) नामक हाथीको सजा करके उसके ऊपर राजाका आसन रखा। ३६ प्रकारके अस्त्रोंको वहा जमा कर, फिर राजाको बैठाया और सब कला कलापसे पूर्ण ऐसा वह स्वय भी कलापके पर पैर रख कर हाथी पर चढ़ा। उस आसन पर बैठ कर चौलुक्य-चक्रवर्ती (कुमारपाल) ने देखा, तो मालूम हुआ कि, सङ्ग्रामके नायक पुरुषोंसे उठाये जाने पर भी, चाहड कुमारके किये हुए भेदके कारण (फुट जानेसे), सामन्त लोग उसकी आज्ञाको नहीं मान रहे हैं। इस प्रकार सेनामें कुछ विप्लव देख कर उसने महावतको [ आगे बढ़नेका ] आदेश किया। सामनेकी सेनामें हाथी परका छत्र देख कर अनुमान किया कि वह सपादलक्ष का राजा [ आ रहा ] है। और यह निश्चय करके कि, सेनाके विघटित (विमुख) हो जाने पर मुझे अकेलेहीको लडना आवश्यक है, उस महावतको, सामनेके हाथीके पास, अपने हाथीको ले चलनेकी आज्ञा दी। पर उसे भी वैसा न करते देख बोला कि-'क्या तू भी फूट गया है?' इस पर उसने कहा-'महाराज ! कलहपञ्चानन हाथी और सामल नामक महावत ये दोनों युगान्तमें भी फूटने वाले नहीं है; किन्तु सामनेके हाथी पर जो चाहड नामक कुमार चढा हुआ है वह ऐसी गभीर आवाज कर रहा है कि जिसकी हाँकके डरसे हाथी भी भाग छूटते हैं। यह सुन कर राजाने [ अपनी बुद्धिमत्तासे, सोच कर ] हाथीके दोनों कानोंको चादरसे बद कर दिया और फिर शत्रुके हाथीसे आ भिड़ाया। इधर चाहड़ने, यह जान कर कि यह चउलिग नामक महावत ही-जिसे उसने पहलेहीसे अपने वशमें कर लिया है-राजाके हाथा पर बैठा है, कुमारपाल को मारनेकी इच्छासे हाथमें कृपाण ले कर अपने हाथी परसे कूद कर 'कलहपञ्चानन' हाथीके कुम्भस्थल पर पैर रखा। इतनेमें महावतने [ बडी चालाकीसे ] हाथीको पीछे हटा दिया। इससे वह चाहडकुमार पृथ्वी पर गिर पड़ा और नीचे खडे हुए पैदल सैनिकोंने उसे पकड़ लिया। इसके बाद चौलुक्य राज ने श्रीआनाक नामक सपादलक्ष देशके राजासे कहा कि-'हथियार समालो!' ऐसा कह कर उसके मुख-कमल पर उचित समझ शिलीमुख (बाण) फेंकने लगा। (उचित इसलिये कि शिलीमुख भौंरेका भी नाम है और भौंरोंका कमलोंकी ओर जाना उचित ही है।) 'तुम बड़े प्रधान क्षत्रिय हो न'-इस प्रकार उपहासके साथ प्रशंसा करते हुए, उसे भुलावेमें डाल कर, जो बाण मारा तो उससे घायल हो कर वह हाथीके कुम्भस्थलसे गिर गया। 'जीत लिया, जीत लिया' कहते हुए राजाने स्वय सारी सेनामें अपने हाथीको इधरसे उधर घुमाया और जो सब सामन्त थे उनके घोड़ों पर आक्रमण करके उनको कैद किया। इस प्रकार यह चाहड कुमारका प्रबंध समाप्त हुआ। * कुमारपालका उपकारियोंको सत्कृत करना। १३३) तत्पश्चात्, कृतज्ञ-सम्राट् चौलुक्यराजने आलिंग कुम्हारको सातसौ गाँववाली विचित्र चित्रकूट पट्टिका (चित्तोड, मेवाडकी भूमि) दी। वे अपने वशके कारण लज्जित हो कर आज भी अपनेको 'सगर' (१) कहते हैं। जिन्होंने कटे हुए बबूलकी डालोंमें छिपा कर राजाकी रक्षा की थी वे अंगरक्षकके पदपर रखे गये। १ हाथीपर चढ़नेके लिये रस्सीका बना हुआ छींका।

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