भारतकोश
प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

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प्रबोधसुधाकर रुधिरत्रिधातुमज्जामेदोमांसास्थिसंहतिर्देहः । स बहिस्त्वचा पिनद्धस्तस्मान्नो भक्ष्यते काकैः ॥१९॥ यह शरीर रुधिर, त्रिधातु (वात, पित्त, कफ), मज्जा, मेद, मांस और हड्डियोंका समूह है; बाहरसे यह त्वचासे मँढा हुआ है इसलिये इसे कौए भी नहीं खाते। नासाग्राद्वदनाद्वा कफं मलं पायुतो विसृजन् । स्वयमेवैति जुगुप्सामन्तः प्रसृतं च नो वेत्ति ॥२०॥ नासिकासे अथवा मुखसे कफको और गुदासे मलको त्याग करते समय मनुष्य स्वयं भी घृणा करता है तथापि इन्हें अपने शरीरके भीतर भरे हुए नहीं जानता। पथि पतितमस्थि दृष्ट्वा स्पर्शभयादन्यमार्गतो याति । नो पश्यति निजदेहं चास्थिसहस्रावृतं परितः ॥२१॥ मार्गमें पड़ी हुई हड्डीको देखकर वह उससे छू जानेके डरसे दूसरे मार्गसे निकल जाता है, परन्तु सब ओर हजारों हड्डियोंसे भरे हुए अपने शरीरको नहीं देखता ! केशावधि नखराग्रादिदमन्तः पूतिगन्धसम्पूर्णम् । बहिरपि चागरुचन्दनकर्पूराद्यैर्विलेपयति ॥२२॥ नखसे लेकर शिखापर्यन्त यह सारा शरीर दुर्गन्धसे भरा ६