भारतकोश
प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

पृष्ठ 67, कुल 86 में से

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सगुण-निर्गुणकी एकता जिस प्रकार गोलाकार सूर्य-मण्डल साक्षात् एक देशमें ही दिखायी देता है, किन्तु वह सम्पूर्ण जगत्‌को प्रकाशित करता है और सबको एक साथ ही सब जगह दीखता भी है । यद्यपि साकारोऽयं तथैकदेशी विभाति यदुनाथः । सर्वगतः सर्वात्मा तथाप्ययं सच्चिदानन्दः ॥२००॥ उसी प्रकार यदुनाथ श्रीकृष्णचन्द्र यद्यपि साकार हैं और एकदेशी-से दिखायो देते हैं तथापि वे सर्वव्यापी, सर्वात्मा और सच्चिदानन्दस्वरूप ही हैं । एको भगवानरेमे युगपद्गोपीष्वनेकासु । अथवा विदेहजनकश्रुतदेवभूदेवयोर्हरिर्युगपत्॥२०१॥ देखो, एक ही भगवान्‌ने एक साथ अनेक गोपियोंके साथ रमण किया तथा विदेह जनक और श्रुतदेव ब्राह्मण दोनोंके घरोंमें एक ही साथ आतिथ्य ग्रहण किया । अथवा कृष्णाकारां स्वचमूं दुर्योधनोऽपश्यत् । तस्माद्व्यापक आत्मा भगवान्हरिरीश्वरः कृष्णः॥२०२॥ इनके अतिरिक्त दुर्योधनने भी अपनी समस्त सेनाको श्रीकृष्णरूप ही देखा था । इससे विदित होता है कि श्रीकृष्णचन्द्र व्यापक आत्मा ईश्वर हरि ही हैं । ७७

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