प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११४ प्रासादमण्डने प्रतिरथ डेढ़ भाग, कोशी आधा भाग और भद्रार्ध एक भाग, इस प्रकार बारह भाग की तल विभक्ति है ॥३६-३७॥ ४-भुवनमण्डन मेरुप्रासाद- त्रिशतं पञ्चसप्तत्या--धिकैर्याण्डकैः सह । भक्तश्चतुर्दशांशैस्तु नाम्ना भुवनमण्डनः ॥३८॥ कोणः कोणी प्रतिरथो नन्दी भद्रार्धमेव च । द्वये कद्वयर्थांशसार्धांशै-श्चतुर्दशविभाजिते ॥३६॥ चौथा भुवनमण्डन नाम का मेरुप्रासाद तीनसौ पचहत्तर शृंगवाला है। इसके तलका चौदह विभाग करे। उनमें से कोण दो भाग, कोणी एक भाग, प्रतिरथ दो भाग, कोणी आधा भाग और भद्रार्ध डेढ़ भाग रखे ॥३८-३६॥ ५-रत्नशीर्ष मेरुप्रासाद- बाणैकवेदयुग्मांशा वेदाः कर्णादिभागतः । रत्नशीर्षो भवेन्मेरुः पञ्चशतैकभृङ्गकैः ॥४०॥ पांचवां रत्नशीर्ष मेरु प्रासाद के तलका बत्तीस भाग करे। उनमें से पांच भाग का कोना, एक भाग की कोनी, चार भाग का प्रतिरथ, दो भाग की नन्दी और चार भाग का भद्रार्ध रखे । इस प्रासाद के ऊपर पांचसौ एक शृंग है ॥४०॥ ६-किरणोद्भव मेरुप्रासाद- गुणैकयुग्मचन्द्रद्वौ पुराणांशैर्विभाजिते । किरणोद्भवमेरुश्च सपादषट्शताण्डकः ॥४१॥ छट्ठा किरणोद्भव मेरु प्रासाद के तल का अठारह भाग करे। उनमें से तीन भाग का कोण, एक भाग की कोणी, दो भाग का प्रतिरथ, एक भाग की नन्दी और दो भाग का भद्रार्ध रखे । इस प्रासाद के ऊपर छसौ पच्चीस शृंग है ॥४१॥ ७--कमलहंस मेरुप्रासाद-- रामचन्द्रद्वियुग्मांशै-र्नेत्रैर्विंशतिभाजिते । नाम्ना कमलहंसः स्यात् सार्धसप्तशताण्डकः ॥४२॥ सातवां कमलहंस नामके मेरु प्रासाद के तलका बीस भाग करना चाहिये । उनमें से