प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७४ प्रासादमण्डने शृंगसंख्या—कोणे १२, प्रतिरथे ८, भद्रे १२, एक शिखर, एवं कुल ३३ शृंग, तिलक संख्या—प्रतिरथे ८ ओर नन्दी पर ८, कुल १६ तिलक । ६-हिमवान् प्रासाद— द्वे द्वे शृङ्गे प्रतिरथे त्वमृतोद्भवसंस्थितौ । हिमवान् द्वे उरुशृङ्गै पूज्यः सुरनरोरगैः ॥२७॥ इति हिमवान् प्रासादः ॥६॥ यह प्रासाद का तलमान और स्वरूप-अमृतोद्भव प्रासाद के अनुसार जानें । विशेष यह है कि—पठरे के ऊपर तिलक के बदले शृंग अर्थात् दो शृंग चढ़ावें और भद्रके ऊपर से एक उरुशृंग कम करके दो उरुशृंग रक्खें। ऐसा हिमवान् नामका प्रासाद देव, मनुष्य और नाग- कुमारों से पूजित है ॥२७॥ शृंगसंख्या—कोणे १२, प्रतिरथे १६, भद्रे ८, एक शिखर, एवं कुल ३७ शृंग और तिलक ८ नंदी के ऊपर । १०-हेमकूट प्रासाद— उरुशृङ्गतत्रयं भद्रे नन्दिका तिलकान्विता । हेमकूटस्तदा नाम प्रकर्त्तव्यस्त्रिमूर्त्तिके ॥२८॥ इति हेमकूटप्रासादः ॥१०॥ यह प्रासादका तलमान और स्वरूप हिमवान् प्रासाद के अनुसार जानें । विशेष यह है कि—भद्र के ऊपर तीसरा उरुशृंग और नंदी के ऊपर दूसरा तिलक चढ़ावें । यह हेमकूट नामका प्रासाद ब्रह्मा, विष्णु और महेश, यह त्रिमूर्त्ति के लिये बनावें ॥२८॥ शृंगसंख्या—कोणे १२, प्रतिरथे १६, भद्रे १२, एक शिखर, एवं कुल ४१ शृंग और १६ तिलक नन्दी के ऊपर । ११-कैलास प्रासाद— नन्दिकाग्रान्ततः शृङ्गं रेखाश्च तिलकोत्तमाः । कैलासश्च तदा नाम ईश्वरस्य सदा प्रियः ॥२६॥ इति कैलासप्रासादः ॥११॥ यह प्रासाद का मान और स्वरूप हेमकूट प्रासाद के अनुसार जानें । विशेष यह हैं कि— नन्दी के ऊपर दो तिलक है, उसके बदले एक शृंग और उसके ऊपर एक तिलक चढावें ।