भारतकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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( २१५ ) कपोताली } स्त्री. प्रासाद के दीवार का पाचवा थर, कपोतिका } केवल थर । कर पु. हस्तनक्षत्र, हाथ । करोटक पु. गुंबज । कर्ण न. कोना, पट्टी, सिंहकर्ण । कर्णक न. कणी, जो थरो के ऊपर नीचे पट्टी रखी जाती है । कर्णगूठ पु. छीपा हुआ कोना, बद कोना । कर्णदर्दरिका स्त्री. गुंबज के उदय मे नीचला थर । कर्णसिंह पु. प्रासाद के कोने पर रखा हुआ सिंह । कर्णाली स्त्री. कणी, जाड्यकुंभा के ऊपर का थर । कर्णिका स्त्री. थरो के ऊपर नीचे की पट्टी, छोटा कोना, कोणा और प्ररथ के बीच मे कोणी की फालना । कर्म न. समूह वाचक, शृंगो का समूह । कलश पु. मडोवर का तीसरा थर, शिखर के ऊपर रखा हुआ कलश । कलशाण्डक न. कलश का पेट । कला स्त्री. रेखा विशेष, सोलह की सख्या । कलास्र पु. सोलह कोना । कपाय पु. ओषधि विशेष । कास्य न. कासा, धातु विशेष । कामदपीठ न. गज आदि हथयरा से रहित पीठ । कारा स्त्री. जेल काल पु वासुदेव, समय । कालन्दी स्त्री. यमुना देवी । काष्ठ न. लकडी । किसुर पु. किन्नरदेव, पुष्ठकंठ के देव । कीर्त्तिवक्त्र न. ग्रासमुख । कीर्त्तिस्तंभ पु. विजयस्तम, तोरणवाले स्तम । कीलक न. कील, खूटा कुज पु मगनग्रह । कुञ्चिता स्त्री. प्रासाद के डैण्ट भाग के मान की कोली कुण्ड न. यज्ञकुण्ड, जलकुण्ड । कुबेर पु. उत्तर दिशा का दिक्पाल । कुंभ पु. मंडोवर का दूसरा थर, कलश । कुंभिका स्त्री. स्तंभ के नीचे की कुंभी । कुलतिलका स्त्री. पाचवी सवरणा । कूटच्छाद्य न. छज्जा । कूर्म पु सोना चादी का कछुआ, जो नीव मे रखा जाता है । कूर्म्मशिला स्त्री. कछुए के चिह्नवाली धारणी शिला । केसरित् पु. पाच शृंगवाला प्रासाद । कैलास पु. केसरी जाति का ग्यारहवा और वैराज्य जाति का ठारहवा प्रासाद । कोटर पु-न. पोलाण । कोटि स्त्री करोड सख्या, रेखा की एक भुजा कोट् पु. किला, दुर्ग । कोल न. गुबज के उदय मे गजतालु थर के ऊपर का थर । कोविद पु पंडित, ज्ञानी । कोष्ठागार न. कोठार । क्षण न. खड, विभाग । क्षिति स्त्री. पाटका देवता, पृथ्वी । क्षितिवल्लभ पु वैराज्य जातिका सोलहवा प्रासाद । क्षिप्त न. लटकती हुई छत । क्षीर न. दूध । क्षीरार्णव पु. समुद्र, वास्तुग्रन्थ विशेष. क्षेत्र न. प्रासादतल । क्षेत्रपाल पु अमुक मर्यादित भूमिका देव । क्षोभणा स्त्री. कोनी ख खण्ड पु विभाग, मजिल, खड । खर पु छट्ठा ग्राय. खरशिला स्त्री. जगती के दाशा के ऊपर और भीट के नीचे बनी हुई प्रासाद को धारण करनेवाली शिला । खल्वशाखा स्त्री. द्वार की नव शाखाओ मे चोथी और आठवी शाखा । खात न. मकान की नीव ।