प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
पृष्ठ 96, कुल 278 में से
संदर्भ में पढ़ेंतृतीयोऽध्यायः ५६ अपराजित पृच्छा सूत्र १२६ में कहा है कि— "उदुम्बरं तथा वक्ष्ये कुम्भिकान्तं तदुच्छ्रयम् । तस्यार्धेन त्रिभागेन, पादोनरहितं तथा ॥ उक्तं चतुर्विधं शस्तं कुर्याच्चैवमुदुम्बरम् । अत्युत्तमाश्च चत्वारो न्यूना द्व्यास्तथाधिका ॥ खुरकोर्ध्वेद्वं चन्द्रः स्यात् तदूर्ध्वं स्यादुदुम्बरः । उदुम्बराद्धे त्र्यंशे वा पादे वा गर्भभूमिका ॥ मण्डपेषु च सर्वेषु पीठान्ते रङ्गभूमिका ।।" उमाशंकर ओ० शिल्पीशास्त्री हस्तिनी सधैशाख्या विस्तार भाग ८ | उदुम्बर भाग ३ | हस्तिनी सधैशाख्या विस्तार भाग ८ ग्रास १ | मंदारक २ | ग्रास १ सिंहशाखा | रूपशाखा | पेद्यशाखा २ भाग ओळख | गंधर्वशाखा | पेद्यशाखा | पेद्यशाखा | गंधर्वशाखा | पेद्यशाखा २ भाग ओळख | रूपशाखा | पेद्यशाखा | सिंहशाखा मंदिर के द्वार की देहजो का उद्भव आर तल भाग तथा अर्द्ध चंद्र ओर गगारक.