प्रश्नोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Prashna Upanishad Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
पृष्ठ 82, कुल 131 में से
संदर्भ में पढ़ें७२ प्रश्नोपनिषद् [ प्रश्न ४
तदक्षरं वेदयते यस्तु सोम्य
स सर्वज्ञः सर्वमेवाविवेशेति ॥ ११ ॥
हे सोम्य ! जिस अक्षरमें समस्त देवोंके सहित विज्ञानात्मा प्राण और भूत सम्यक् प्रकारसे स्थित होते हैं उसे जो जानता है वह सर्वज्ञ सभीमें प्रवेश कर जाता है ॥ ११ ॥
| विज्ञानात्मा सह देवैश्चाग्न्या- | जिस अक्षरमें अग्नि आदि | | दिभिः प्राणाश्चक्षुरादयो भूतानि | देवोंके सहित विज्ञानात्मा तथा | | पृथिव्यादीनि संप्रतिष्ठन्ति | चक्षु आदि प्राण और पृथिवी आदि | | प्रविशन्ति यत्र यस्मिन्नक्षरे | भूत प्रतिष्ठित होते अर्थात् प्रवेश | | तदक्षरं वेदयते यस्तु सोम्य | करते हैं, हे सोम्य—हे प्रियदर्शन ! | | प्रियदर्शन स सर्वज्ञः सर्वमेव | उस अक्षरको जो जानता है वह सर्वज्ञ | | आविवेशाविशतीत्यर्थः ॥ ११ ॥ | सभीमें आविष्ट अर्थात् प्रविष्ट हो जाता है ॥ ११ ॥ |
इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यश्रीमद्गोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्य-
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रश्नोपनिषद्भाष्ये
चतुर्थः प्रश्नः ॥ ४ ॥