भारतकोश
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

महाकवि भास द्वारा

DevanagariHindipublished178 पृष्ठ

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( 176 ) प्रतिहारी—(मन में) अरे, अब क्या होगा ? (प्रकट में) स्वामी, अच्छा । (इसके बाद कैकेयी और प्रतिहारी का आगमन) कैकेयी—विजये, क्या भरत मुझसे मिलने आया है ? प्रतिहारी—महारानी, हा राजकुमार राम के पास से तात सुमन्त्र आए हैं . उनके साथ राजकुमार भरत ने महारानी ने मिलने की इच्छा प्रकट की है । कैकेयी—(मन में) न जाने किस बात पर भरत ताडना देगा । प्रतिहारी—महारानी, क्या राजकुमार आ जाएं ? कैकेयी—जाओ । उन्हें भेज दो । प्रतिहारी—महारानी, ठीक है । (घूम कर ओर पास जाकर) राजकुमार की जय हो । आप प्रवेश कीजिए । भरत—विजये, क्या सूचना दे दी ? प्रतिहारी—हाँ । भरत—तो फिर हम दोनों प्रवेश करे । (प्रवेश करते हैं) कैकेयी—पुत्र, विजया ने कहा है कि राम के पास से सुमन्त्र आए हैं ? भरत—आपको मैं इससे भी अच्छी सूचना दे रहा हूँ । कैकेयी—पुत्र, तब तो क्या कौसल्या और सुमित्रा को भी बुला लें ? भरत—नही, उन्हें नहीं सुनाना चाहिए । कैकेयी—(मन मे) अरे, पता नहीं क्या बात है । (प्रकट में) पुत्र, कहो तो । भरत—सुनो, जो अपने राज्य का परित्याग करके तुम्हारी आज्ञा से वन में गए थे, उनकी पत्नी सीता का अपहरण हो गया है । अब तो तुम्हारी इच्छा पूरी हुई । (१३) कैकेयी—अहो ! भरत—हाय, दुःख है कि तुम्हारी जैसी बहू को पाकर अत्यन्त पराक्रमी और सम्मान वाले इक्ष्वाकु वंश के लोगों को अपनी स्त्री के अपहरण को भी देखना पडा । (१४)