भारतकोश
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

महाकवि भास द्वारा

DevanagariHindipublished178 पृष्ठ

पृष्ठ 163, कुल 178 में से

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पृष्ठ 163

(184) तापस-- नन्दिलक, कुलपति ने कहा है कि अपनी स्त्री का अपहरण करने वाले, तीनो लोको को व्याकुल करने वाले रावण को मारकर, राक्षसी आचरण के विरुद्ध, अनेक गुणो से मण्डित विभीषण का अभिषेक करके, देवताओं और ऋषियो के सम्मुख अपने पवित्रचरित्र को प्रमाणित करने वाली देवी सीता को लेकर, भालू, वानरो और राक्षसों के प्रमुख व्यक्तियो से घिरे हुए श्री राम यहाँ आए हुए है, जो शरद् ऋतु के स्वच्छ आकाश के चन्द्रमा के समान सुशोभित हो रहे है। आज इस तपोवन मे अरण्य सुलभ भोग-वैभव के अनुसार उनका स्वागत करने के लिए जो अभीष्ट है, वह सब सज्जित करके रखा जाए। नन्दिलक--आर्य, सब कुछ तैयार है। किन्तु, तापस--यह क्या ? नन्दिलक--यहाँ विभीषण के साथ अन्य राक्षस भी है। उनके खाने के सम्बन्ध में कुलपति ही जानें। तापस--किसलिए ? नन्दिलक--वे तो मांस भी खाते है। तापस--अरे, मत घबराओ। वे राक्षस तो विभीषण के वश में रहने वाले है। नन्दिलक--तो ऐसे सज्जन राक्षस को नमस्कार। (निकल जाता है) तापस--(देख कर) अरे, ये तो श्रीमान् राम है। जो- "हे मनुष्यो मे श्रेष्ठ, आपकी जय हो। आप अपने दूसरे शत्रुओ पर भी विजय प्राप्त करें। यह पृथ्वी एकच्छत्र वाली होकर आपके अधीन हो" इस प्रकार प्रसन्न बने बहुत से मुनियो द्वारा प्रशंसित होकर राजा राम पुष्पक- विमान से पृथ्वी तल पर उतर गए है। (१)