भारतकोश
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

महाकवि भास द्वारा

DevanagariHindipublished178 पृष्ठ

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( 191 ) राम -- सीते, भरत के साथ तुम्हारी सासुएँ आ रही हैं। उनके दर्शन के लिए तुम्हारी आँखो को विशाल बना लो। सीता -- आर्यपुत्र, चाहे गए समय पर भरत आ गए। (इसके बाद भरत का माताओं के सहित प्रवेश) भरत -- आज अतिप्रसन्न हृदय वाला मै अपने आत्मीय जनो के साथ, शरद् काल मे बादलो से रहित् स्वच्छ चन्द्रमा के समान, नाना प्रकार के संकटो से मुक्त हुए, पूज्य सीता के सहित राम को देखने को इच्छुक यहा आया हूँ। (६) राम -- जननियो, मै प्रणाम करता हूं। सभी -- पुत्र चिरजीव रहो। सौभाग्य से, अपने वचन निभाकर, सीता के साथ तुम्हे कुशलतापूर्वक देख कर हम बहुत सुखी हैं। राम -- कृपा से युक्त हूँ। लक्ष्मण -- जननियो को प्रणाम। सभी -- पुत्र, चिरजीवी बनो। लक्ष्मण -- कृपायुक्त हूँ। सीता -- पूज्य जनो को प्रणाम। सभी -- वत्से, सदा सुहागिन रहो। सीता -- कृतकृत्य हो गई। भरत -- आर्य, मैं भरत आपको अभिवादन करता हूँ। राम -- आओ, वत्स, इक्ष्वाकुकुमार, तुम्हारा कल्याण हो। दीर्घायु बनो। किवाडो के समान अपने विशालवक्ष स्थल को फैलाओ और अपनी दोनों लम्बी भुजाओ से मेरा आलिंगन करो। अपने शरद् कालीन चन्द्रमा के समान इस सुन्दर मुख को ऊपर उठाओ तथा मेरे इस दुःख से सन्तप्त शरीर को आनन्द प्रदान करो। (७) भरत -- अनुगृहीत हूँ। हे देवी, मैं भरत प्रणाम करता हूँ। सीता -- आर्यपुत्र के साथ बहुत समय तक रहो। भरत -- अनुगृहीत हूँ। आर्य, मैं प्रणाम करता हूँ। लक्ष्मण -- वत्स, आओ, आओ, दीर्घायु बनो। मेरा प्रगाढ आलिंगन करो (आलिंगन करता है)