भारतकोश
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

महाकवि भास द्वारा

DevanagariHindipublished178 पृष्ठ

पृष्ठ 62, कुल 178 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 62

( 61 )

श्लाघनीये = प्रशंसनीय । राहुदोषे = राहु से ग्रस लेने पर । तारा = चन्द्रमा की पत्नी रोहिणी । याति = चली जाती है । करेणु = हथिनो । पङ्कलग्नम् = कीचड़ मे फँसे हुए । व्रजतु = जाए । चरतु = आचरण करे । 'भर्तृनाथा = स्वामी के अधीन । आच्छिद्य = छीन कर । अननुभूताः = काम में नहीं लिए गए । निर्वर्त्यताम् = पूरा कीजिए । अन्वय-सत्यम् अवेक्षमाणे ताते धनु नमयि । स्वधनं हरन्त्यां मातरि शर मुञ्चानि, दोषेषु बाह्यम् अनुज भरत हनानि, त्रिषु पातकेषु रोषणाय किं रुचिरम् । (२२) अन्वय-यत्कृते महति क्लेशे राज्ये मे मनोरथ. न । चतुर्दश वर्षाणी त्वया वने वस्तव्यम् किल । (२३) अन्वय-अनया दत्तान् वल्कलान् तावत् मङ्गलार्थे आनय । अन्यः नृपै नैवाप्त नोपपादितं धर्म करोमि । (२४) अन्वय- राहुदोषे ऽपि तारा शशाकम् अनुचरति । च वनवृक्षे पतर्ति लता भूमि याति । करेणुः पंकलग्नं गजेन्द्र न त्यजति । व्रजतु धर्मम् चरतु । हि नार्यः भर्तृनाथा । (२५) हिन्दी अर्थ लक्ष्मण-आर्य यह आया । राम-तुमको शान्त करने के लिए ही मैने ऐसा कहा है । अब तुम ही बताओ । अपनी प्रतिज्ञा का पालन करने वाले पिताजी पर धनुष उठाया जाये । पूर्व प्रतिज्ञात अपने विवाह शुल्क को माँगने वाली, माता पर वाण छोड़ूँ । अथवा निर्दोष बने हुए छोटे भाई भरत को मारूँ । इन तीनो भयंकर पापो मे से तुम्हारे क्रोध को कौन-सा अच्छा लगता है ? (२२) लक्ष्मण-(आँसू भर कर) हाय धिक्कार है । हमे विना जाने ही आप उलाहना दे रहे है । जिसके कारण महान् दुःख हो रहा है, उस राज्य के प्रति मेरी अभिलाषा नही है । मुझे पीडा यह है कि १४ वर्ष तक आपको वन में रहना पड़ेगा । (२३) राम-क्या इस पर महाराज बेंहोश हो गए । हाय, उन्होने तो अपनी अधीरता दिखा दी । हे सीते,