भारतकोश
प्रत्यभिज्ञाहृदयम् (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैवदर्शन एवं जयदेव सिंह सान्वय हिन्दी भाष्य)

प्रत्यभिज्ञाहृदयम् (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैवदर्शन एवं जयदेव सिंह सान्वय हिन्दी भाष्य)

Pratyabhijnahridayam of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary

आचार्य क्षेमराज द्वारा

DevanagariHindipublished187 पृष्ठ

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१०० प्रत्यभिज्ञाहृदय शक्ता ज्ञातुं नेश्वरप्रत्यभिज्ञा- मुक्तस्तेषामेष तत्त्वोपदेशः ॥ समाप्तमिदं प्रत्यभिज्ञाहृदयम् ॥ कृतिस्तत्रभवन्महामाहेश्वराचार्यवर्यश्रीमदभिनवगुप्तपादपद्मोपजीविनः श्रीमतो राजानकक्षेमराजाचार्यस्य ॥ शुभमस्तु ॥ (उत्पलदेव द्वारा लिखा हुआ ईश्वर प्रत्यभिज्ञाग्रंथ) नहीं समझ सकते उनके लिए यह तत्व का उपदेश (प्रत्याभिज्ञाहृदयम् नामक ग्रंथ द्वारा) कहा गया है। यह प्रत्याभिज्ञाहृदयम् ग्रंथ समाप्त ही गया है। यह पूज्य महामाहेश्वरा- चार्यवर्य श्रीमान् अभिनवगुप्त के चरणकमल पर आश्रित श्रीमान् राजानक क्षेमराजाचार्य की कृति है। (सब का) कल्याण हो।