प्रत्यभिज्ञाहृदयम् (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैवदर्शन एवं जयदेव सिंह सान्वय हिन्दी भाष्य)
Pratyabhijnahridayam of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary
आचार्य क्षेमराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३ ) ऐ ऐश्वर्यशक्ति ७४ क कञ्चुक ५९ कठवल्ली ८५ कठिनत्वेन ५२ कर्तृत्व ५५ कर्तृतात्मा ७४ कर्तृताशून्य ५० कर्मेन्द्रिय ६६ करणेश्वरी ७९ कला ४६, ५९, ६६, ७३, ९४ क्रममुद्रा ९१, ९२ कारणत्व ४४ कार्यकारणभाव ४५ कामं ५८ काल ४५, ४७, ५८, ५९, ६६, ६७ कालाग्नि ९४ किञ्चित्कर्तृत्व ६६, ७३ किञ्चिज्ज्ञत्व ६६ कृत्रिम ६० कृशा ६४ क्रिया ५६, ५९ क्रियाशक्ति ६६ क्रीडा ८२ ख खानि ८६ ख्याति ५३ खेचरी ७३ खेचरीचक्र ७३
ग ग्राहक ४७, ४९, ५१, ५२, ५३, ५४, ५८, ७१, ७७ ग्राह्य ४७, ४९, ५०, ५१ गृहीतप्राणादिसंकोच ५८ गृहीतसंकोच ७५ गोचरी ७३ गोचरीचक्र ७३ च चक्रवर्ती ९८ चक्रेश्वर ९८ चतुरात्मा ५८ चमत्कार ६९ चार्वाक ६० चित् ४५, ४९ चितः ४५, ४८, ५६, ७९ चितिः ४४, ४५, ४६, ५१, ५४, ७६, ७७, ७८, ८० चित्त्व ४८ चित्प्रकाश ४५, ७५ चित्प्राधान्य ५४ चित्प्राधानत्वे ५५ चित्तम् ५४, ५६, ५७, ७६ चित्तमय ५६ चित्तसंस्कारवती ५७ चितिचक्र ९८ चितिवह्नि ७७ चितिशक्ति ७३, ९२, ९७ चितिशक्तिमयीप्रथा ९६ चिदग्नि ६९ चिद्रूप ९७