प्रत्यभिज्ञाहृदयम् (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैवदर्शन एवं जयदेव सिंह सान्वय हिन्दी भाष्य)
Pratyabhijnahridayam of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary
आचार्य क्षेमराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४ ) चिद्वत् ६७, ७५ त चिदात्मन् ६७, ७४ तत्त्व ५४ चिदात्मा ५८, ६५ तदग्र ८७ चिदानन्द ७२, ८१, ८२, ९० तदात्मा ९० चिदानन्दघन ४३, ६३, ७५ तन्मध्य ८७ चिदैक्य ९१ तन्मयत्व ९० चिदैकात्म्य ८१ तन्मयीकरण ९६ चिन्ता ५३ तन्मूल ८७ चिन्मय ५३ तमस् ५५, ५६ चेतन ५१, ५४, ७६ तांत्रिक ६२ चेत्य ५४, ५५ तीक्ष्णतर्कशास्त्र ४४ चेत्यमान ८१ तीक्ष्णयुक्ति ९९ चैतन्यम् ५७ तुरीया १२ चैतन्यविशिष्ट ६० तुर्य ७५, ८८ तुर्यातीत ७५, ८४ छ त्रिकादिदर्शन ६२ छन्न ७५, ७७, ७८ त्रिमय ५८ छाया ४६ त्रिशिरोभैरव ५२ छेद ८८ द ज दर्पण ४८ जगत् ४५ दर्शन ६०, ६३ जगतः ४९ द्वादशान्त ८९ जगदात्मना ४५ दिक्चरी ७३ जगदानन्द ९५ दिक्चरीचक्र ७३ जाग्रत् ७५ द्विरूप ५८ जीव ५४, ६१ दुःख ६० जीवन्मुक्त ६८, ८२ देव ६७ जीवन्मुक्ति ७५, ८१ देश ४५, ४७, ५८, ६७ ज्ञान ५६, ५९, ६०, ९७ देह ४७, ६७, ७२, ७५, ७६, ७९, ज्ञानसन्तान ६० ८१, ८२, ९६ ज्ञानशक्ति ६६ दृगादिदेवी ६९