भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 133

१२२ पृथ्वीराजरासो । [ आदि पर्व ॥ आनन्दसेवजी का राज करना ॥ तहां तप्पि तेज आनन्द सेव । बाराह रूप दिद्ध्यौसु देव ॥ धरनी विचार आभास साद । मंड्यौ सु राज पहुकर प्रसाद ॥ छं० ॥ ६१२ ॥ सो * वरष राज तप अंत कीन । सिर क्व सोम पुच्च सु दीन ॥ ॥ सोमेश्वरजी का सिंहासन पर विराज राज करना ॥ सोमेस सूर गुज्जर नरेस । मालवी राज सब लग्ग पेस ॥ छं० ॥ ६१३ ॥ मारू बजाडू भहीन थान । घल सोमि लई बल चाहुवान ॥ दिल्लेस व्याह तोवर घरेस । तिह ग्रब्भ भयौ पीथळ नरेस ॥ छं० ॥ ६१४ ॥ आनन्द राज नंदन सु सोम । सोरिया दखनि तिन कियौ होम ॥ निय पुर सु नयर सुर लग्गि धोम । आनन्द केलि अजमेर भोम ॥ छं० ॥ ६१५ ॥ रू० ॥ ३१८ ॥ ॥ सोमेश्वर जी की शूरता का संक्षेप वर्णन ॥ कवित्त ॥ जिहि सोमेसर सूर । सूर जित्ते धुरसानी ॥ जिहि सोमेसर सूर । चढिवि गुज्जर घर आनी ॥ जिहि सोमेसर सूर । लियौ नाहर परिचारिय ॥ बल उप्पम कवि चंद । चंद राहा जिस मारिय ॥ नरिंद । छेह । देह । कांम । गैह । गेह । दिन । भंडारि । अवन सुनहि । जपत । पुत्तान चाहु- वांन । गहव । गहव मुकि । ऊति । रीत । चित्त । रचक्र । चुकि सौ । अठ । तिहां । तपि । रूप । दैध्यौ । सट्ट । प्रसद्द । सौ । सोम । सोमैस । सूर । गुजर । पग । पैस । मारू । वज्ञाय । भट्टी । यांन । लइ । बल । चाहुवांन । दिल्लेस । दिल्लेश । तुंवर । घरेश। गर्भ । यभ । पित्यल । पीथ्यल । नरेश । मोरीयां । दल । दलह । कीयौ । नैर । लगि । कल ॥

  • चौघट्टि सत्त = इस के विरुद्ध कोई दूसरा पाठ हमारे पास की पुस्तकों में नहीं मिलता किन्तु कोई २ वृद्ध कवि चौसट्ठि सत्त करके मूल में पाठ होना कहते हैं और उस से ६४+७ = ७१ वर्ष की संख्या निकालते हैं और कोई १०० वर्ष और चार घड़ी और कोई ७ वर्ष और चार घड़ी का वाचक पाठ कहते हैं किन्तु ऐसे सब स्थल पक्षपात रहित विद्वानों के सूक्ष्म विचार करने योग्य हैं ॥
  • इस सो शब्द का पाठ किसी २ पुस्तक में सौ भी है कि जिस से वर्ष की संख्या के समझने में बड़ी गड़बड़ हो जाती है । यह स्थल भी विद्वानों की बुद्धि को भ्रम देने जैसे है । यदि कोई शुद्ध अंतःकरण से पूर्वापर का लेखा लगा देखेगा तो वह चंद कवि को संवत संबन्धी कठिनता को जान कर बहुत प्रसन्न होगा ॥ ३२०. पाठान्तर :- जिहिं । सोमेत्थर । जिने । धुरसांनी । चढै । चढे । भांनी । भांती । लीयौ । परिहारी । परिहारीय । बलि । उपम । राहां । सारी । मारोय । बैरन । द्वोरि । रांजोर । बर । पां । मइ । गुजर । गूजर । गज यौ ॥