भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 165, कुल 470 में से

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पृष्ठ 165

१५४ पृथ्वीराजरासो । [ आदि पर्व पद्धरी ॥ लिखि सिष्य कुँच्चर पृथिराज राज । गुरु द्रोन पास सुत धर्म्म ताज ॥ ॐ नमो सिद्धि प्रथमं पठाय । सब भाव भेद अच्छर बताय ॥ छं० ॥ ७३० ॥ दस पंच † दिन्न अध्येन कीन । दस च्यारि सार सब सीष लीन ॥ सीषी सु कला दस अठ च्यारि । तिन नाम कहत कवि अग्ग सारि ॥ छं० ॥ ७३१ ॥ गुरु गीत बाद बाजिच नृत्य । सोचक सु वाच्य संविचार वृत्य ॥ मनि मंच जंच वास्तुक विनोद । नैपथ विलास सुनि तत्त मोद ॥ छं० ॥ ७३२ ॥ साकुन्न कला क्रीडन विसार । चिचन सु जोग कवि चवत चारु ॥ कुसु सेष कला जुत इंद्र जाल । सुचि क्रम विचार आचार लाल ॥ छं० ॥ ७३३ ॥ सौभग प्रयोग सुगंध वस्त्र । पुनरोक्त छंद वेदोक्त घस्त ॥ बानिज्ज विनय भांषित्त देस । आवद्ध जुद्ध निर्जुद्ध सेस ॥ छं० ॥ ७३४ ॥ बरनंत समय हस्ती तुरंग । नारी पुरुष पंषी विचंग ॥ भू भू कटाछ सुलेष सल्य । वृष कल्प प्रण उत्तर विजय ॥ छं० ॥ ७३५ ॥ सुभ सास्त्र कहे गनिकच पठन । लिषतव्य चिच्च कविता वचन ॥ व्याक्रन्न कथा नाटकक छंद । अविधांन दरस अलंकार बंध ॥ छं ॥ ७३६ ॥ धातक सु कर्म्म सुभ अर्थ जानि । सुर सरी कला बहुतारि बषान ॥ छं० ॥ ७३७ ॥ रू० ॥ ३७१ ॥ दूहा ॥ कला बहुत्तर करि कुसल । अति निबद्ध जिय जानि ॥ हेत आदि जानन निपुन । चतुरासीत विग्यान ॥ छं० ॥ ७३८ ॥ रू० ॥ ३७२ ॥ † इस दसपंच शब्द को पंद्रह ही दिन का वाचक नहीं समझना किन्तु कुछ दिन अथवा कुछ समय अथवा थोड़े दिनों का वाचक समझना उचित है क्योंकि रूपक ३७० में स्पष्ट कोइक दिन पाठ आय गया है ॥ ३७१ पाठान्तर :—लिपि । शिष्यि । सिषि । कुंचरं । कुंच्छर प्रिथीराज । पृथीराज । गुरं गुर । द्रोणा । पासि । ध्रम । नमः सिद्धिं । पठाइ । भैद । अष्यर । बताइ । बताई । अध्ययन । अध्यैन । दस पंच छिद्दा अध्येन कीन । सीषि । अठ । नांम । कहित । अंग । सार । गुर । नत्य । सौचक । नृत्य । वास्तुन । विनौद । नैपथ । सुंनि । तत । साकुन । शाकुंन । विस्तार । विचार । सू जोग । कुंस । युत । सोभग । प्रयोग । पुनरुक्ति । वैदोक्त वस्त । बांनिज । भाषित आवध । युद्ध । नियुद्ध । सैस । पुरुष । वचंग । भूं भूं । सुलेष ब्रष । छंद । उत्तर । विजयं । कहै । पठंन । लिषितं व्याचित्र । लिपिव्य । वचन । व्याक्रन । नाटकं । नाटिक । दरसन । अलंकार । शुभ । जांनि । जांण । वषांनि । ३७२ पाठान्तर :—बहुतरि । जांनि । जांनन । विद्धान । विग्यांन ॥

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