भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 168, कुल 470 में से

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पृष्ठ 168

आदि पर्व ] पृथ्वीराजरासो । १५७ अरिल्ल ॥ आनन इंदु उदोत सु मानौं । जानन भोज विचषन जानौं ॥ रवि ज्यौं सहुन के तन तापन । कामिनि कौं मकरध्वज मानन ॥ छंदं ॥ ७५६ ॥ रु० ॥ ३८० ॥ अरिल्ल ॥ जा सरनागत मानव वंछै । जा सरनागत दानव डूछै ॥ जा सरनागत देव विचारै । सो प्रिथिराज पृथीपति सारै ॥ छंदं ॥ ७५७ ॥ रु० ॥ ३८१ ॥ दूहा ॥ प्रिथ्विराज पति प्रिथ्विपति । सिर मनि कुन्नी छतीस ॥ नृप सिप पर मित जस तजै। ते गुन वरनि बतीस ॥ छंदं ॥ ७५८ ॥ रु० ॥ ३८२ ॥ तिन सहाय असुरह सुभट । सत सामंत रु सूर ॥ तिन सु कित्ति प्रगटी करन। कछी चंद कवि पूर ॥ छंदं ॥ ७५६ ॥ रु० ॥ ३८३ ॥ कवित्त ॥ चहूआन कै वंस । वीर मानिक पुच दस ॥ ता सु कित्ति कवि चंद । जनम लग्गै जंपत जस ॥ ज्यौं वीत्यौ भारत्थ । आदि अंतच त्यौं जंपौं ॥ वय वानी सु प्रमान । लग्न सगनह गुन थप्पौं ॥ ज्यौं भयौ जनम कवि चंद कौ । भयौ जनम सामंत सब ॥ इक थान मरन जनमच सु इक । चल्लहि कित्ति ससि लग्गि रव ॥ छंदं ॥ ७६० ॥ रु० ॥ ३८४ ॥ ॥ एक दिन रात्रि को चंद की स्त्रीका रस में आकर पृथ्वीराज जी की आदि से अंत तक कीर्त्ति वर्णन करने के लिये चंद को कहना ॥ गाथा ॥ समयं इक निसि चंदं । वाम वृत्त वहि रस पाई ॥ दिद्धी ईस गुनेयं । कित्ती कहो आदि अंताई ॥ छंदं ॥ ७६१ ॥ रु० ॥ ३८५ ॥ ३८० पाठान्तर :-आनंन । इंदु । इंद । उद्दोत । समानौ । मानौ । ज्ञांनन । जातन । भौज । विचख्यन । जांनो । भांन । शत्रुंन । सचुंन । कै । कांमिनी । कुं । मकरधज । मांनन ॥ ३८१ पाठान्तर :-मांनव । इच्छै । दांन । वंछैः । सरनागति । सो । प्रथ्वीराज । पृथ्विपति ॥ ३८२ पाठान्तर :-प्रिथीराज । प्रिथ्वीपति । प्रथ्वीराज पृथ्वी पति । शिर । कुंली । शिप । तजे । तै । कु तीन । छत्तीस ॥ ३८३ पाठान्तर :-आसुरह सुरह । कित ॥ ३८४ पाठान्तर :-चहुआंनारैं । चहुवाना कै । वंश । मांनिक । मानक । स । जन्म । लगे । लगै । ज्यो । वित्यौ । भारथ । ज्यो । जंप्यो । वांनी । प्रमांन । लगन लगनह । मगनं । थप्यो । जन्म । कौ । सामंत । थांन । मरेण । जन्म दिन इक । जनंम । कित्त । शसी । ससो । रिव । रवि ॥ ३८५ पाठान्तर :-यांहू । इस । कहों ॥

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