भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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२६६ पृथ्वीराजरासो । [ तीसरा समय १२ मातुल का अपने मन में मोह करना ॥ दूहा ॥ सुनत सुपन सोमेस सुअ, बज्जाए बर बाज । गिन्यौ सु मातुल सोच मन, औ अवनिंय काज ॥ छं० ॥ ४७ ॥ रु० ॥३४ ॥ पृथ्वीराज का स्वप्नफल सुन आनन्द में फूला न समाना ॥ पद्धरी ॥ सुनि सुंपन मात फल कहै राइ । दरिया तरंग मनं मोज पाइ ॥ ज्यों सोए सेह आगम अनंद । राका चकोर ज्यों मुझ चंद ॥ ४८ ॥ चंदनह बन्न ज्यौं पाय चिन्ह । तिह नाह पिष्ष ज्यौ सुभग सिंघ ॥ संग्राम भूमि ज्यौं सुभट पिष्ष । गुरु विह्यावंत ज्यौं पाय सिष्प ॥ ४९ ॥ घत्तार घत्त ज्यौं दृष्ष चोट । दातार पाइ जाचिक्क टोट ॥ पंडिप्त पाइ ज्यौं गुनियगाह । व्यांपार पाइ ज्यौं साह चाह ॥ ५० ॥ परि वित्त पेपि ज्यौं खेल ज्वारि । कुछ कैल पाइ लंपह नारि ॥ ध्यानंद सु यौं प्रथिराज पाइ । फुल्ल्यौ सु अंग अंगह न साइ ॥ ५१ ॥ बज्जे अनंत वज्जांच्च अनंद । दिय दान विदुष दुज भह वृंद ॥ दिन दिन नरिंदं तन दसा बढ्ढि । चढढंत दीह जो दसा चढ़ि ॥ ५२रु०३५ स्वप्नफल सुन कर पृथ्वीराज की सर्वस्व वृद्धि कैसे होने लगी ॥ कवित्त ॥ चढत नही जिम सेह, नेह नवला जुबनागम । सिद्धदाह दिन चढत, सु गुरु सिष्यक विद्या क्रम ॥ सस्त्र ओप ज्यौं अरनि, लच्छि व्यापारह बढ़त । बढ़त भह गज बंस, बेलि द्रुम सीसच चढ्ढत ॥ जिम सरह रयनि सुद पष तिथि, बढ़त कला ससि तम गमत । चहुआन सूर सोमेस सुअ, रूम सुदसा दिन दिन जमत ॥ छं० ॥५३॥ रु०॥३६॥ कवित्त ॥ बढ़त पटन उमराव, बढ़त साधन तुरियन दल । बढ़त भंडारन दाम, बढ़त कोठार अन्नबल ॥ ३४ पाठान्तर-अधनिय ॥ ३५ पाठान्तर-राय । दरीयाव । पाय । मुख । पाइ । चिन्ह । पखि । सील । पिखि । विद्या- बंत । सिखि । दृष्टि । जाचिग । पंडित । गुनयग्राह । लंपट । पाय । माय। दानं । चढंत । दशा । चढ़ि ॥ ३६ पाठान्तर-लक्ष । वढत । चहुआन ॥