भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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२६८ पृथ्वीराजरासो । [तीसरा समय १४ गाथा ॥ हरषि राज प्रथिराजं, कीरति कीन सूर सामंतं । बगसि ग्राम गजबाजं, अजानंबाह दीनयं नामं ॥ छं० ॥ ५७॥ रु० ॥ ४० ॥ * दिल्ली किल्ली कथा का उपसंहार ॥ दूहा ॥ सुपन सुफल दिल्ही कथा, कही चंदवरदाय । अब अग्गे करि उच्चरौं, पिथ्य अकूँर गुन चाय ॥ छं० ॥ ५८ ॥ रू० ॥ ४१ ॥ इति श्रीकविचंदविरचिते पृथ्वीराजरासके दिल्ली किल्ली कथा वर्णन नाम तृतीय प्रस्ताव संपूर्णम् ॥ : : *४० पाठान्तर-ग्रांम । बाज । अजांनं ॥ ४१ पाठान्तर-दिल्लोय । वरदाय । अगैं । उचरौं । पिथ । कूँअर । गुनचार ॥