भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पाँचवां समय ६ ] पृथ्वीराजरासो । २८६ तुरस फहि कटि गुरज । सुकुट करि रेष रिपेसर ॥ असि कट्टत वर रोस । उदर वर बचिय सु ओझर ॥ विन पत्त मत्त जनु डंड डक । रंभ पंभ कर कटीयध्वज ॥ तिच्चि काज साज साकत्त सुरर । सु गुरुर पठाइय गुहरध्वज ॥ छं० ॥ ५१ ॥ रू० ॥ २७ ॥ माधव खवास का युद्ध ॥ कवित्त ॥ काम धाम रिम राच । स्याम जिम धाम पिथ्यपति ॥ पत्त लत्त दिय रोस । फद्दि किप्पाट थाट भजि ॥ धसिय मध्य माधव षवास । आय पत्तौ तहां आरौ ॥ लगिग वथ्थ विन नत्थ । संड मल्ल मच्चि अपारौ ॥ जम दट्ट कट्ठि चालुक चँपि । दिच्छ पाँनि पावार उर ॥ मंडलु दिनेस में भेद करि । सुपाट परट्टिय ब्रह्म पुर ॥ ॰ छं० ॥ ५२ ॥ रू० २८ ॥ कन्ह का युद्ध ॥ कवित्त ॥ परि भूमि पावार । उररि भंजन किवार दुव ॥ तव लगि कन्ह तमंकि । आइ पहुंच्यौ अंतकलुच्च ॥ मुक्कि रोस असि तमसि । घाइ सिर जाइ रह्यौ उत ॥ मनहुं सत्ति वल्ल दैन । अंग जनु हन्यौ अजा सुत ॥ तिन हनत सिंभु धुन हनिय सिर । राज गेह मधि समर हुच्च ॥ हल चलकि मच्चि कोलाहलह । हाय हाय दरबार हुच्च ॥ छं० ॥ ५३ ॥ रू० ॥ २९ ॥ २७ पाठान्तर—सुजानि ! वीन । आकास । शीस । रिषीसर । औझर । उझर । कटीय । स्वन । तिहिं । तक्के सुरर ॥ २८ पाठान्तर—कांम । धांम । स्यांम । घांम । प्रथ्यपति । पत । लत । पट्टि । क्लिपाट । मधि । लगि । बथ । नथ । मच्चि । जमदठ । चालुक । चंपि । दिठ । गै । परठिय ॥ २९ पाठान्तर—तमकि । हुअ्र । मुकि । शिर । मनहुं । शक्ति । देन । हलहलिकि । मचि । हाइहाइ ॥