भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 299

२८८ . पृथ्वीराजरासो । [ पांचवां समयं ८ हरसिंह का युद्ध ॥ कवित्त ॥ हकि कह्वर हरसिंह । बध्य नरसिंह विज्झिगय ॥ लथ्य बध्य लोहांन । उपरं तरं तर परि दग्गिगय ॥ नंधि अद्ध नरसिंह । भयौ हरसिंह उद्ध वरं ॥ दौरि राव चामंड । दई तरवारि पिठ्ठ पर ॥ कर फौरि मुक्कि डर अद्धधर । भयौ विबंधव बंटि घर ॥ हरिसिंह बस्यौ हरिसिंघ पुर । रवि मंडल बज भेदि करि ॥ कं० ॥ ४८ ॥ रु० ॥ २४ ॥ दूहा ॥ भेद्यौ रवि मंडल सु पहु । करि प्राक्रमम प्रमान ॥ धनि चालुक पित मात धनि । निकासि न षोयौ मान ॥ कं० ॥ ४९ ॥ रु० ॥ २५ ॥ नरसिंह का युद्ध ॥ कवित्त ॥ करि उप्परि तें दूरि । तरच्च नरसिंघ सु उट्टिय ॥ तवै भरकि अगवान । आइ सिर सार सु बुट्टिय ॥ जब नरसिंघ नरंन । करन कट्ठी कहारिय ॥ धखि धथ्य गत्त बध्य । तेन उदरं विच फारिय ॥ पर भूमि सूर भगवान भिरि । चल्यौ प्रांन जरद्ध अय ॥ है है सु सबद मृत लोक भय । जै जै सुर सुर लोकजय ॥ कं० ॥ ५० ॥ रु० ॥ २६ ॥ कैमास का युद्ध ॥ मोकंच गढि गोकंच सुजान । मद मोकन कुंदिय ॥ तुहिय वीज अकास । सीस कैमास अछुहिय ॥ २४ पाठान्तर-बथ । लथ । बथ । लोहांन । उप्पर । धर लग्गिय । चामुंड । फौरि । मुकि । अध । बिबंधव ॥ २५ पाठान्तर-प्रमांन । मांन ॥ २६ पाठान्तर-उठिय । तब । भगवांन । कंटारिय । हथ । बथ । विचि । फारी । भगवांन । सुसद । म्रत ॥