भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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३१० पृथ्वीराजरासो । [छठां समय १२ झापटा बीर जब जुखत जुद्ध । नहिं सहत जोर दनुदेव सुद्ध ॥ मांनिक्क भद्र है मेर मान । ठेलन अठिल्ल गढ द्रुग्ग पान ॥ ८२ ॥ कपडिया बीर कछा करौंकिन्ति । मन वित्त राग जै मुक्ति जित्ति ॥ केदाइ राइ नव जुद्ध आप । दिषन्त नैन जिन जात पाप ॥ ८३ ॥ नरसिंघ बीर नरसिंघ रूप । चौगुन विलास आतम अनूप ॥ गोरिया बीर गुन सकल जानि । नव रसन रास नाना विनांन ॥ ८४ ॥ घट घंट बीर जनमे सुजान । सोषत समुद्र अरि समुद्र पानि ॥ कंटंभ्य बीर सुनि समर बाज । दनु दलन कटक में परै गाज ॥ ८५ ॥ बग नाम बीर जब समर कच्छ । बग लेत ढुंढ जनु नीर मच्छ ॥ माच्छवगाव वल्लंग अंग । अदभूत अंग रुपह सुरंग ॥ ८६ ॥ संतो साइ सत मतह सुधीर । पर मध्य अच्य भव नाव कीर ॥ मच्चा संतोस सत संग धार । सेवक समुद्र भव नाव पार ॥ ८७ ॥ भ्रमराइकाइ बल्ल वाय वेथ । भ्रम परे समर छल परैं लेथ ॥ मच्चाभमराइ काइक्क अजीत । भ्रम होइ ताहि जाकूर चीत ॥ ८८ ॥ सहसाष अष्यि कर सहस जान । जानु द्रुपद मध्य रहै रच्छ दान ॥ सह स्त्रांग अंग नित रूप चिच । भय भीत अभय भै करन मिच ॥ ८६॥ बेच पाल चिति पल करै प्याल । नाना चरित गोपाल बाल ॥ भूतषनडू बीर बलबन्त कूर । तटवन्त षिभिरू तनं करत चूर ॥ ६० ॥ साक्किनीमार अदभूत जोर । समरन्त भक्त तन हरत रोर ॥ बेदरी रीति भङ्गम बलाय । कलपंत करन जे तके तपाइ ॥ ६१ ॥ सालि बाहनह ससि सूर रूप । सेवकं निवाजि बुर करत भूप ॥ ए नाम बीर सुनि चंद लेइ । पहिचांनि प्रसन करि विदा देइ ॥ कुं० ॥ ९२ ॥ ६० ॥ २७ ॥ समीर । वांन । दनुंनि । पांनि । पांन ॥ ७६ ॥ बीर । त्रिगुन । क्रभंत । जल हरन ॥ ८० ॥ नांम । करूं । करौं । पाय । सहाय । करौ । ध्यानं । जिहिं । ग्यांन । घ्यांनं ॥ ८१ ॥ झापरा । युद्ध । नह । माणिकं भद्र । मांन । पांनि ॥ ८२ ॥ कापडिया । कहां । करौं । वीत । जिति । केदाइराय । दिषंत । नैन ॥ ८३ ॥ त्रिगुन । गोठिला । जांन । जांनि । विनांन ॥ ८४ ॥ घटघंटे । दुजान । मैं । सुं जांन । समुंद । यांनि । कुनटेभ्य । सनि । मैं । परै ॥ ८५ ॥ बग । नांम कछि । कच्छ । लैतं । ढुंठि । मछ । माहवगाव ॥ ८६ ॥ सत्त । मत्तह । परमध्य । अथ । नामकीर । बीर सत्यंग ॥ ८७ ॥ भ्रमराय काय । परें । परै । महाभ्रमराय । कायक । होत ॥ ८८ ॥ सहसाष्य अषि । जांनि द्रुपद । रखि । दांन ।'सहश्रांग ॥ ८६ ॥ चित्रपाल । बाल । पाल । 'भूतषनाय । भूतपनारू । पिंभि ॥ ९० ॥ सांकिमीमार । बलाय । पाय ॥ ६१ ॥ सालिवाहन । नांम । लेई पहिचान ॥ ६२ ॥