भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 323, कुल 470 में से

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पृष्ठ 323

छठा समय १७ ] पृथ्वीराजरासो ३१३ कवित्त ॥ दुजपति चंकह हिरन । इक्कनिभय सुभाव अति ॥ गजनंतह टाग्ग । विघ्न विय दिट्ट गनपति ॥ षट आनन वर जोर । दतिय उप्पीय निसंक उर ॥ भगवति वाहन सिंघ । बेदग जीय सुमेर थरि ॥ वरदाइ चंद सुपच्चारि पग । पंचम वछ सुपछ रचहि ॥ आतंक अवर आरन्य पसु । डर घरहरि कंपत रचहि ॥ छं० ॥ ९९ ॥ रू० ॥ ३४ ॥ कवित्त ॥ छहरि हिरन हारियव । हेरि कातर रव रहिय ॥ अप्प घास भय मोछ । विरछ लग्गी चटपहिय ॥ हिय धरक्क धुधरह । वदन लोइन जल निझझर ॥ तंकित चकित संकीन । समग संकरिय दुप्भर ॥ सैरत्त चमकन्त पत्त रव । पिनक चित्त जिम उप्परै ॥ पिल्लंत सिकार पिथ कुँअर डर । पसु पींपर दल थरथरै ॥ छं० ॥ १०० ॥ रू० ॥ ३५ ॥ कवित्त ॥ पोमिन वन नहिं चरहि । नहिन संचरहि कुमुद वन ॥ ईप षेत परहरहि । जीर परहु अविग्त मन ॥ मंथर गति लखि मुंघ । कास कानन नह चप्पहि ॥ नह पिप्पै नियनारि । नहिन चष कंदनि रप्पहि ॥ गिरि मद्धि गह्वर गुहअह वसहि । नीर समीप न संचरहि ॥ खोमेस सुतन आखेट उर । इमड ढाल उस सह चसहि ॥ छं० ॥ १०१ ॥ रू० ॥ ३६ ॥ कवित्त ॥ गिर कंदर सर वरह । सरित कच्छह घन गुच्छह ॥ निझ्झर कूल न द्रष्टन । बेतनल्ल तिन सर पुंजह ॥ ३४ पाठान्तर:-इक सुभिय निसंक अति । गजघटन तह । गजनंतह । दिट्ठिय । गनपति । छतीय । उपीय । निसंक। गज्जीय । गर्जिय । थिर । रहिय । आतंक । आरंन्य । रहिय ॥ ३५ पाठान्तर:-हहकि । हीरन । हारीयव । रच । अय । लगिय । धरक । धुंधर । निझर । संकित । समग्ग । संकरीय । दुप । भयपन्न । चमकत । पन्न । ऊपरैं । पिलत । कुँअर । पिंयद ॥ ३६ पाठान्तर:-नहि । चरहिं । दृप । परहरत । परभय । मथर । मुध । चपहि । पिपैं । नाहि । रपहि । मधि । गुज्जह । इमद । सहि ॥

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या) · पृष्ठ 323, कुल 470 में से · BharatKosha