भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 388

३०८ पृथ्विीराजरासो । [ आठवां समय १० कवित्त ॥ जग्गि सूर सोमेस । सेन सज्यौ हयगय नर ॥ राका निसि जनु उदधि । चढैं छल्लोर चंद पर ॥ सुन्यौ श्रवन दृढ बैन । लरचि प्रथिराज जलनदछ ॥ पुच्छ चांपि जनु सिंघ । दिषि प्रजल्यौ नयन झल ॥ दडू बंब दृतिय जनु गगन रव । छुटि चंदुन गज गुरि चलिय ॥ दीसंत मत्त छहैं नयन । मनौं प्रबत पंषछ चलिय ॥ छं० ॥ ४४ रू०॥२७॥ दूहा ॥ ठनक घंट घुघ्घर धमक, धमक धरनि बर पाहू ॥ झमकत सुंड लपेट भट, भरत देत गिर राहू ॥ छं० ॥ ४५ ॥ रू० ॥ २८ ॥ दूहा ॥ पग लंगर जंजीर जरि, कज्जल गिरवर चंग ॥ दिघदंत बग घन बरन । झरत मदंग छहंग ॥ छं० ॥ ४६ ॥ रू० ॥ २९ ॥ दूहा ॥ पब्बय कै पावस जलद, दल दाढन उठि कोर । दिषावत दल बहलन, भर घर परत अघोर ॥ छं० ॥ ४७ ॥ रू० ॥ ३० ॥ दूहा ॥ दंति पंक्ति कज्जल बरन, दिषि ढलमल ढाल ॥ करछरंत बैरष लषी, दल सोमेस भुआल ॥ छं ० ॥ ४८ ॥ रू० ॥ ३१ ॥ दूहा ॥ उठी कोर हथ गय प्रवल, दिठ दुअन कुटि धीर ॥ दिषि धनु धर हथनारि धरि, भरकि अरहरी भीर ॥ छं० ॥ ४९ ॥ रू० ॥ ३२ ॥ छंद विराज* ॥ कियं चित्त पंगे । घटं घट भंगे ॥ उमंगे सुअग्गे । मनौं बीर जग्गे ॥ छं० ॥ ५० ॥ २७ पाठान्तरा-रन । चढै । सून्यो । बैनं । पृथीराज । पुछ । दिषि । प्रज्जरै । दई । दहूय । चंदून । छहै । छकैं । मनो । पंषकि ॥ २८ पाठान्तर-ठनक । घुघर । धमकि । पाय । राय ॥ २९ पाठान्तर-कजल । दिग्ध । दिघ । सदंग ॥ ३० पाठान्तर-दिषावत । दिषावै । दल बल दलन ॥ ३१ पाठान्तर-दंत पंत । दिषि । ढल मल । वैरषलकी ॥ ३२ पाठान्तर-हय दल । देखि धनुष हथ नारि धरि । फरकि ॥

  • इसी समय के रूपक २२ की टिप्पण के साथ इस रूपक को भी ध्यान में लेना चाहिए ॥