पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 402, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ेंअप्प सु चिन्द्यि अवर दिन, रज पठवै रसाल ॥ छं० ॥ २४ ॥ रु० ॥ २४॥ कवित्त ॥ तरकंस पंच गिरंभ । तीन प्रति षगत तीन सच ॥ खुरासान कंमांन । पंच परमान मान जह ॥ गज सु एक सिंघ लीय । श्वेत तन मह रत्ति चह ॥ गुंजते मधुप कपोल । गज्ज भज्जै प्रेमल सच ॥ हय पंच साजि साकति सुनग । ऐराकी कुल उच्च जिहि ॥ अंमोल बज्र इक लाल दोय । रिंझ समिप्पय राज सचि ॥ छं० ॥२५॥॥२५॥ दूहा ॥ राजन रषिय सब्ब इह, प्रनवेज प्रति मंत । उभै परस्पर गंठि परि, संचिय पेम सुमंत ॥ छं० ॥ २६ ॥ रु० ॥ २६ ॥ शहाबुद्दीन का चार दूत अजमेर भेजना ॥ दूहा ॥ च्यारि दूत अजमेर पुर, थिर मुक्केसु विहान । आखेटक बन देषि कै, तक्कि गए चहुआन ॥ पृथ्वीराज का हुसैन को कैथल, हासी, हिसार का पर्गना देना और शिकार में साथ रखना, यह सब समाचार दूतों का शहाबुद्दीन से कहना ॥ कवित्त ॥ आखेटक चहुआन । पास हुस्सेन संपत्तौ ॥ बार आइ चहुआन । भाइ घन ताहि दिषत्तौ ॥ नीति राव कुटवाल । तास अच राज सु अप्पिय ॥
- वर कैथल हंसि हिंसार । राजपहो दै थप्पिय ॥ इह चरित देषि सब दूत तब । जाइ संपते साहि दर ॥ चरावर चरित जुग्गिनी पुरह । कत्थिय बत्त सें मुष्षंधर॥ छं० ॥२८॥ रु०॥२८ २४ पाठान्तर-धरी । हुसेन । चीन्हे । पठवै ॥ २५ पाठान्तर-तीन । पतंग । खुरासांन । कंमांन । पच परमांन मांन जिहि । सिंघलीय । मद रति । गज । भंजे । परिमल । है । उंच जिहि । दुइ । रोज ॥ २६ पाठान्तर-रषिय । घन । २७ पाठान्तर-यिह । मुके । मुक्कै । विहान । चहुआन ॥ २८ पाठान्तर-चहुआन । हुसेन । संपत्तौ । आय । भाद्र । दिर्षंतौ । नीतिराज । कुटं- बार । * अधिक पाठ है ॥ कैथल । हांसी । हिंसार । पटो । थपीय । जाय । साहिवर । चवर । चरित । जुगिनी । सुष ॥