भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 406

३४६ पृथ्वीराजरासो । [ नवां समय १२ गज्जनै कांन केतुक सहाब । गरु अत्त वत्त जंपै कहाव ॥ हुस्सैन आइ प्रथिराज थान । सरनै सुकांन कढ्ढै नियान ॥ कूं० ॥ ५१ ॥ दल सज्जि सीम चंपै सुसाद्दि । दल भंजि ग्रहै प्रथिराज नाद्दि ॥ अरब खां का अपना निरादर होता देख उठ आना और ग़ज़नी को कूच करना तथा शहाबुद्दीन से सब समाचार कहना ॥ मानी न खेष आरब्ब बत्त । सामंत सूर देषे विरत्त ॥ कूं० ॥ ५२ ॥ आदरह मंद तजि उठ्यौ खेष । अंधार बदन द्रिग बहि तेष ॥ पुच्छीय जुगति नृप मचल जानि । उठि गर्व दुष्प मन छीन मानि ॥ कूं० ॥ ५३ ॥ चढि चल्यौ खेष रह साद देस । गज्जनै गयै। मन मानि रेस ॥ गय मचल साद्दि मिल्लि कहिय बत्त । सिर धूनि रीस करि नैन रत्त ॥ कूं० ॥ ५४ ॥ उठि गयौ साह बद्दल मछल्ल । आसंन साजि बैठो सथल्ल ॥ छं० ॥ ५५ ॥ रु० ॥ ३४ । दर्बार करके शहाबुद्दीन का तातार ख़ां, अरब ख़ां, मीर जलाम, कासाम, खुरासा ख़ां, रहन मन्जन ख़ां, रुस्तम ख़ां, हाजी ख़ां, ग़ाज़ी ख़ां, जस्मन ख़ां, गज़नी ख़ां, सुहब्बत ख़ां, मीर ख़ां, आदि सरदारों को बुला कर सलाह करना ॥ कवित्त ॥ सजि आसन साचाव । साह काजी मत बैठा ॥ बोलि मक्कू तत्तार । बोलि आरबू दिन जेठा ॥ ३४ पाठान्तर-उचस्यौ । वैन । आरब । शेष । संलाम ॥ ४३ ॥ युगमौत । अथि । उवरें । वैन । जंपै । कहै । भाह । नाह । ॥ ४४ ॥ तथ्य । तथ । प्रथौराज । भृकटी । आरक्त । मुष्य । श्रुत्ति । कलि ॥ ४५ ॥ उचस्यौ । बांनि । आरन्य । संच्यौ । जांन । आरब । सुरतांन । जांनि ॥ ४६ ॥ प्रथीराज । अतुलित । युद्ध । हुसैन । यांन । जोधांन । बिब्रीय । आंन ॥ ४७ ॥ जंपै । चहुवांन । बुझै ॥ ४८ ॥ गर्जे । कोपें । मृगेंद्र । मृगेंद्र । उतकृष्ट । नरिंद्र । तजि । जपि । गोयंद । बैन ॥ ४८ ॥ तेज़वांन । निरभैं । सतास । पयांन । उचस्यौ । उप ॥ ५० ॥ गजनौ । केतक । जंपे । हुसेन । प्रथोराज । यांन । कांन । नियान ॥ ५१ ॥ सजि । सीस । प्रथौराज । मांनी । आरब । शेष । विरत्त । शेष । पुक्किय । नृप । जांनि । दुष । मांनि ॥ ५३ ॥ गजनैं । मांनि । धुनि । नैन ॥ ५४ ॥ मद्दल । सुथल्ल ॥ ५५ ॥