भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 407

नवां समय १३ ] · पृथ्वीराजरासो । ३६० मीर जमांम कमांम । षांन षुरसांन न्यांन वर ॥ षांन रहंनं महंनं । षांन रुस्तंम मचा भर ॥ हाजीय षांन गाजीय षां । षांन जर्मन बंधव सुचिय ॥ गजनौय षांन महुवत्ति षां । मीर षांन सब बोलि लिय ॥ कूं० ॥ ५६ ॥ रु० ॥ ३५ ॥ तातार ख़ां का कहना कि तुरन्त पृथ्वीराज पर चढ़ाई करनी चाहिए ॥ कवित्त ॥ कहै साचि साहाब । अहो तत्तार षांन सुनि ॥ जिन जुमत्ति उपज्जै । कहै सब षांन जानि मन ॥ गौ आरब चहुआन । फेरि आयौ सु सुनिय सब ॥ रुस्त रप्पि हुस्सेन । बोलि सामंत राज अब ॥ जंपिय तत्तार संजो सयन । छनै राज प्रथ्रिराज रन ॥ है गै सुबंध बंधौ रिनच । मेरे कि गहि कुद्है सुतन ॥ कूं० ॥ ५७ ॥ रु० ॥ ३६ ॥ खुरासान ख़ां का तातार ख़ां से कहना कि उसके बल को भी विचार लो जल्दी न करो ॥ दूहा ॥ कहै षांन षुरसांन तब । अहो षांन तत्तार ॥ चाहुआन सामंत बल । चिंति सुधिविधि विचार ॥ कूं० ॥ ५८ ॥ रु० ॥ ३७ ॥ अरब ख़ां का कहना कि उसका बल अतुल है तुम लोगों ने देखा नहीं है इससे ऐसा कहते हो ॥ दूहा ॥ कहै सेष आरब अतुल । बल सामंत नरिंद ॥ अबे न तुम दिषिय नयन । सजो सैन बिन बंध ॥ कूं० ॥ ५८ ॥ रु० ॥ ३८ ॥ शाह का बल पराक्रम का हाल पूछना ॥ दूहा ॥ कहै साचि आरब्ब तुम । कहौ सूर सामंत ॥ कछा क्रांति प्राक्रम कहा । सत्ति पयं पहु तंत ॥ कूं० ॥ ६० ॥ रु० ॥ ३९ ॥ ३५ पाठान्तर-बोल । मरु । जिठै । जमांम । कमांम । षुरसांन । न्यांन । महंनं ॥ ३६ पाठान्तर-मति । ऊपजै । जांनि । चहुआन । स सुनिय । हुसेन । सजौ । हनै । मेरै ॥ ३७ पाठान्तर-कहें । चित्त सुबुद्धि विचार ॥ ३८ पाठान्तर-जै । शेष । दिषिय ॥ ३९ पाठान्तर-आरब । तुत्र । क्रांति । सत्य ॥