पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 71, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ें५८ पृथ्वीराजरासौ । [ आदि पर्व ॥ वीसल देव जी का वर्णन ॥ अग दुष बीर बीसल नरिंद । बहु पापरत्त द्रव्यान अंध ॥ कुं० ॥ २८२ ॥ क्रत अक्रित काम क्रित्तह सु कीन । जिन असुर घोर अनि द्रव्य लीन ॥ संसार थागि फुनि द्रव्य काज । उपजाडू मत्ति अजमेर राज ॥ कुं० ॥ २८३ ॥ कौडी सु मोल मज कियौ एक । लीयो न किनह फिरि सचर नेक ॥ कामंध अंध सुझ्यौ न काल । चक अचक जोरि गिरि ढुक्कं माल ॥ कुं० ॥ २८४ ॥ चल्ल्यौ न राजनीतह प्रमान । आनीत बंधि नृप थान थान ॥ सुझ्यौ न अम्म चाल्यौ प्रमान । मुकजौ निगम्म करि अगसमान ॥ कुं० ॥ २८५ ॥ अबलोच छोह खंडिय सु कित्ति । मुक्कयौ अम्म आअम्म जित्ति ॥ दरबार अतिथ दीसै न कोइ । अप्प सुह कित्ति संभरै लोइ ॥ कुं० ॥ २८६ ॥ चौसठि बरस बर राज कीन । पायौ न पुत्र फल सुंष छीन ॥ बल अचछ चित्त चिंत्यौ मु काल । पायौ न सुक्रत कछु करन साल ॥ कुं० ॥ २८७ ॥ गति अंत सुमति होइ बीर । पाबै सु जम्म जज्जर सरीर ॥ द्रषि गयौ सुमन वीसल नरिंद । उपनौ बीर खिति बीष कंद ॥ छं० ॥ २८८ ॥ घन मदन सदन भरि स्त्रब्ब जस्म । तिह परत उठि कत्या कदम्स ॥ ६१ रामकृष्णजी ६२ बलदेवजी ६३ हरदेवजी ६४ भीमजी ६५ सहदेवजी ६६ रामदेवजी ६७ वसुदेवजी ६८ श्यामदेवजी ६९ हरिदासजी ७० महीधरजी ७१' वामदेवजी ७२ श्रीधरजी ७३ गंगाधरजी ७४ महादेवजी ७५ शारंगधरजी ७६ मानसिंहजी ७७ चक्रधरजी ७८ शत्रुजितजी ७९ हलधरजी ८० महाधनुजी ८१ देवदत्तजी ८२ दामोदरजी ८३ काशीनाथजी ८४ लीलाधरजी ८५ धरणीधरजी ८६ रमेशजी ८७ भगवतदासजी ८८ कृष्णदासजी ८९ शिवदासजी ९० हरिपूर्णजी ९१ देवीदासजी ९२ कर्मचंद्रजी ९३' रामदासजी ९४ महानन्दजी ९५ विष्णुदासजी ९६ महारामजी ९७ रेवादासजी ९८ अमरसिंहजी ९९ गंगादासजी १०० मानसिंहजी १०१ विशंभरजी १०२ मथुरादासजी १०३ द्वारिका- दासजी १०४ माधवजी १०५ सुदासजी १०६ वीरभद्रजी १०७ गोपालजी १०८ गोविन्ददासजी १०९ माणिक्यराजजी दूसरे ( इन के दो पुत्र बड़े हनुमानजी और छोटे सुयीवजी जिन में से पाटवी हनुमानजी सांभर का राज्य अपनी प्रसन्नतां से सुग्रीवजी को देकर आप पटना जीत वहां के राजा हुए कि जिन के वंश में इकतीस ३१ प्रकार के घूर्षये चौहान हुवे) ११० सुग्रीवजी (सांभर के राजा हुए) १११ अंगदजी ११२ केसरीजी ११३ जयंतजी ११४ जगदीशजी ११५ जयरामजी ११६ विजयरामजी ११७ कृष्णजी ११८ जीतयुहुजी ११९ गोबर्हुनजी १२० मोहनजी १२१ गिरिधरजी १२२ उदयरामजी ( उद्यमजी) १२३ भारंगजी १२४ अर्जुनजी १२५ शत्रुंजीतजी १२६ सोमदत्तजी १२७ दुःखंतजी १२८ भीमजी १२९ सत्यपालजी १३० परशुरामजी १३१ रघुरामजी (मांदोट के राजा से सात दिन लड़कर सांभर छोड़ बुरहानपुर अपने सुसरे के यहां भाग गये और वहीं मरे) १३२ समरसिंहजी १३३ माणिक्यराजजी तीसरे (सांभर इन्होंने पीछे विजय कर ली) १३४ मधुकर्मजी